रूबरू | Part 23 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
तुमको कैसे पता की हम यहां पर पहुंच गए हैं? ताबिश अपनी हैरानी छुपा न सका।
यह तो बहुत आसान था।
हां आपको समझ नहीं आया तो अलग बात है। उसने ताबिश का मज़ाक उड़ाया।
फ्रेश होकर डाइनिंग हॉल में पहुंचो मैं भी आ रहा हूं। साथ में लंच करते हैं।
ताबिश उसके मज़ाक को नज़रंदाज़ कर गया। इस वक्त वह सिर्फ उसका साथ चाहता था।
आपको फिक्र करने की ज़रूरत नहीं है मैं लंच कर लूंगी। वह आगे बढ़ गई।
ताबिश सरफराज़ का साथ किस्मत से मिलता है। वह उसके पास से कहते हुए आगे बढ़ गया।
मायरा उसे जाता देखती रही।
आज पहली बार उसे ताबिश की बात बुरी नहीं लगी। वह धीमी गति से आगे बढ़ गई।
....
भाभी ने जुनैद के लिए अशमारा (मायरा) का हाथ मांगा है।
रूकय्या अब्दुल हमीद को खाना परोसते हुए कहती हैं।
तुमने क्या कहा?
मैंने बोल दिया है कि अशमारा से और आपसे पूछ लूं। फिर जवाब दूंगी।
रूकय्या भी कुर्सी खींच कर बैठ गईं।
अशमारा कब वापस आ रही है?
कल फोन आया था। बोल रही थी जल्द वापस आयेगी।
अभी उससे कुछ मत कहना। जब घर आ जाए तब बात करना। आकिल की मौत का सदमा अभी उसके दिल से निकला नहीं होगा। हमें बहुत समझदारी से उससे यह बात करनी होगी। हमीद उदास हुए।
आकिल की मौत ने सब कुछ बिखेर कर रख दिया। रूकय्या का गला रूंध गया।
उदास मत, उसके लिए उससे बेहतर लिखा होगा। हमीद ने तसल्ली दी। लेकिन खुद भी अंदर से टूट गए।
शादी वाले घर में दूल्हे की मौत हो जाना बहुत बड़ी बात है। उनकी बेटी का घर बसने से पहले ही उजड़ गया। उनके लिए उससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है।
आकिल के आफिस से भी फोन आया था। वह अशमारा को पैसे लेने की ज़िद कर रहे थे। हमीद को उदास देखकर रूकय्या ने बात बदल दी।
तुमने क्या कहा?
मैंने कह दिया कि अशमारा अभी कहीं है । जब आयेगी तो बात करा दूंगी।
यह तुमने अच्छा किया। अशमारा का फैसला आखरी फैसला होगा। हम उसके फैसले के साथ होंगे।
हमीद ने बात खत्म कर दी।
....
शाम को मायरा दादी के साथ लॉन में बैठी चाय पी रही थी। आज बहुत दिनों के बाद वह बाहर लॉन में चाय पी रहे थे।
तभी वहां पर ताबिश भी आ गया।
बैठते ही उसने कचौड़ी उठा ली।
मायरा ने उसके आने पर कोई ध्यान नहीं दिया। उसने पूरा ध्यान चाय पर दिया हुआ था।
क्या बात है आज दोनों बहुत खामोश हैं। दादी मन ही मन सोचती हैं।
तभी उन्हें आलिया आती दिखाई देती है। वह दूर से ही हाथ हिलाती है।
पास आकर पहले वह दादी के गले लगती है फिर ताबिश से हाथ मिलाकर चेयर पर बैठ जाती है।
बहुत दिनों के बाद आई। ताबिश के चेहरे पर मुस्कान थी।
तुमने मुझे याद किया? आलिया इतराई।
तुम भूलने वालों में से नहीं हो। ताबिश की आंखों में चमक आ गई। बहुत मौके से आई हो आलिया। मायरा को जलाने का इससे अच्छा कुछ और नहीं हो सकता।
यह कौन? उसका का इशारा मायरा की तरफ था।
मायरा...
मेरी दोस्त की बेटी। दादी जल्दी से बोली। वरना उन्हें ताबिश से डर था कि वह कुछ गलत न बोल दे।
पहले कभी नहीं देखा।
पहली बार आई है। तुम कचौड़ी खाओ। दादी ने बात बदल दी।
ताबिश दादी के अंदाज़ पर मुस्कुरा उठा।
चलो आलिया हम ऊपर चलते हैं। आलिया के चाय पीते ही ताबिश उठकर उसकी ओर हाथ बढ़ाता है।
आलिया उठकर खुशी से ताबिश का हाथ थाम लेती है।
ताबिश एक भरपूर नज़र मायरा पर डालता है।
लेकिन मायरा उसकी नज़रों को इग्नोर कर गई।
उन दोनों की हंसी देर तक मायरा के कानों में गूंजती रही।
चलो मायरा हम भी अंदर चलते हैं। दादी भी उठ खड़ी हुईं।
चलें...वह उनका हाथ पकड़ती है।
दादी को उनके कमरे में छोड़कर वह अपने कमरे में चली गई।
उसका मन बहुत उदास हो गया था। कुछ तो था जो उसे परेशान कर रहा था। उसकी आंखों के सामने बार-बार ताबिश के आलिया का हाथ पकड़ना और उसके साथ खुश देखना उसे बुरा लग रहा था।
वह किसी के भी साथ रहे। किसी का हाथ पकड़े। मुझे उससे क्या? वह खुद को समझाती है। लेकिन अपने अंदर की उदासी वह दूर नहीं कर पाती।
और जब उसे कुछ समझ नहीं आया तो उठकर बाहर चली गई।
दादी हॉल में बैठी टीवी देख रहीं थीं। वह भी उनके पास जाकर बैठ गई।
पता नहीं आलिया है कि चली गई? बैठे-बैठे उसके मन में ख्याल आया।
मैं क्यों उसका सोच रही हूं। वह खुद को समझाती है। और सारा ध्यान टीवी देखने में लगा देती है।
क्या हुआ किस सोच में गुम हो? दादी उसके कंधे पर हाथ रखती हैं।
क्या हुआ दादी?... वह चौंक गई।
कहां गुम हो? मैंने तुमको आवाज़ दी। लेकिन तुम बोली ही नहीं।
दादी उसके चेहरे को गौर से देखती हैं। उसके चेहरे की उदासी दादी से न छुप सकी।
मैंने सुना नहीं दादी...लगता है बहुत ध्यान से टीवी देख रही थी। कहते ही वह हंस पड़ी। हंस कर शायद वह खुद को तसल्ली दे रही थी कि सब ठीक है।
चलो खाने का टाइम हो गया। दादी उठ गईं। वह भी दादी के साथ उठ खड़ी हुई।
....
रात बीत रही थी। लेकिन मायरा की आंखों में नींद के निशान तक नहीं थे। वह उठकर बाहर लॉन में चली गई। कुछ देर ठहलने के बाद वह वहीं झूले पर लेट कर आंख बंद कर लेती है।
ताबिश जो स्टडी रूम में बैठा किताब पढ़ रहा था। थकन होने की वजह से वह उठकर टहलने लगा। टहलते-टहलते जैसे ही वह खिड़की के पास आया। उसकी नज़र लॉन में झूले पर पड़ गई।
लॉन की मद्धिम रौशनी में किसी का वहां होना उसे खतरे का आभास हुआ।
कौन हो सकता है? गार्ड को खबर करता हूं। मन में आए ख्याल को नकार कर वह खुद देखने चला गया। जाते वक्त वह अपनी गन ले जाना नहीं भूला।
लॉन में झूले के नज़दीक जाकर देखते ही वह हैरान हो जाता है। मायरा बेखबर सो रही थी।
उसे सोता देख वह एक टिक उसे देखने लगा। और फिर वह उसके चेहरे के पास झुक गया।
जारी है...
रूबरू भाग 24
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