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Anmol moti by Little _Star

  Anmol moti by Little_Star 🖋️  वह एक नन्हा सितारा जो फलक पर है मगर लेकिन  ना कोई साथ है उसके बहुत तन्हा बहुत खामोश.... 🖋️    ज़िंदगी इसी का नाम है...... एक अच्छी सोच के साथ, एक अच्छी शुरुआत। ......زندگی اسی کا نام ہے ایک اچھی سوچ کے ساتھ ، ایک اچھی شروعات ۔  🖊️  وہ ایک موقع، وہ ایک وقت، وہ ایک لمحہ، وہ ایک پل، وہ ایک   گھڑی، وہ ایک بات، وہ ایک یاد، اور وہ۔۔۔۔۔۔۔  اے چاند! کبھی کبھی لفظ نہیں ہوتے  کہنے کے لئے کچھ۔   -Little_Star   🖊️  زندگی کچھ یوں گزاریں کہ جب آپ جائیں ،اس گھر سے، اس شہر سے، اس دیس سے ، اس دنیا سے تو پیچھے رہ جانے والے ہر انسان کی آنکھ نم ہواور ہونٹوں پر دعا ہو۔  -Little_Star 🖊️ ہر لمحوں کا اپنا ایک مول ہوتاہے۔ ہر لمحہ کو بعد میں محسوس کرنے کے بجاۓ  🖊️  मौत लिखना न ज़िन्दगी की कहानी लिखना जब भी लिखना मेरे एहसास      🖊️  یقین دل میں  ہونا چاہیے۔وعدے کا کیا ہے   دل میں یقین ہونا چاہیے ۔ وعدے کا کیا ہے وہ تو زبان سے ادا ہوتا ہے۔  🖊️ دل ...

Shahi Tukda

 शाही तुकड़ा  सामग्री:-  ब्रेड 1 पैकेट  दूध  1.5 लीटर लगभग चीनी 1 पाव लगभग खोया 1 पाव लगभग घी तलने के लिए  ज़ाफरान  पिस्ता  बादाम  तैयारी:-  🔪 पिस्ता बादाम को पानी में पांच छः घंटे के लिए भिगो दें। और फिर पिस्ता बादाम का छिलका उतारकर पतला-पतला लम्बे आकार में काट लें। पिस्ता बादाम को काटने के बाद किसी प्लेट या पेपर पर फैला दें जिससे की वह अच्छे से सूख जाए।  🥢 ब्रेड को घी में तेज़ आंच पर फ्राई कर लें। बहुत लाइट फ्राई नहीं करना है। डार्क फ्राई करना है।   🍜 खोया को कड़ाई में डालकर चलाएं। जब खोया गर्म हो जाए तो उसमें थोड़ा सा दूध डालें और चलाएं। जब खोया और दूध अच्छे से पक जाए तो उसमें चीनी डालें। और ज़ाफरान भी  डाल दें। चीनी घुल जाने पर आंच को बंद कर दें। शाही तुकड़ा की रबड़ी तैयार है।   🥛 दूध को उबालें। और उसमें चीनी और ज़ाफरान डालें। और कुछ देर धीमी आंच पर पकाएं। शाही तुकड़ा का दूध तैयार है।  विधि:-   ♦️किसी भारी तले वाली परात या फिर पैन लें। और उस पर ब्रेड को फैला दें।  ♦️ ब्रेड को इस त...

हया | Haya (The Essence of Modesty)

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वह जो घूंघट में सदा, खामोश थी बिल्कुल हया उठ गया घूंघट जो अब, बेहया मशहूर वह.... हया..... हया जो झलके सदा ही तुझ में  खामोश हो लब और नज़र हो नीची ढंका हो सिर और अदब हो जिसमें ना आवाज़ ऊंची ना हो लब कुशां ही सवाल हो ना वहां पे कोई  जवाब देने की क्या बात फिर हो  करे वह सब काम कुछ ऐसे जैसे कोई मशीन हो या हो वह रोबोट ना दर्द हो उसको थके कभी ना वह बाते सबकी सुने है हरदम  सुनाये अपने कभी ना वह जो  क्या सुबह हो और होती क्या रात  मुहब्बतों को कहां वह पाती  जिस्म को अपने कहां बचाती जो रूह से मिलती कभी तो रूह भी  ख्वाब अकसर यही वह बुनती सबक वह जो पढ़ा है उसने सही है सब कुछ गलत नहीं कुछ  तो फिर सही वह नहीं गलत वह  ना कोई सपना ना कोई ख्वाहिश  यही तो ख्वाहिश करें हैं सब ही जिये तो लेकिन मगर ना अपनी  हो जैसे गिरवी कहीं रखी हो  हां होती ज़िदा मगर कुछ ऐसे  कोई वह बुत हो चले मगर जो हज़ार दुख दर्द और ख्वाब लेकर  यहां जो जी ले वही है अच्छा  जो ज़िन्दगी को गुज़ारे ऐसे  खिताब उसको ना कोई मिलता  मगर जो खोले यहां कोई लब...

बूढ़ा बचपन | भाग 3 |

दोष: हमारी सोच और किस्मत | Blame: Our Thoughts and Destiny | Poetry

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  यहां दोषी नहीं कोई, नहीं है दोष किसी का भी   हमेशा दोष तेरा ही, नहीं है दोष कभी मेरा.... दोष ( हमारी सोच और किस्मत).... जहां हो दोष अपना ही, वहां फिर दोष किसको दें   चुना उसको यही है दोष, या फिर कुछ भी कहे वह भी  उसे देखा जब उसने था, ख्याल कुछ यूं ही आया था बहुत अच्छी ना थी लेकिन, बुरा उसको कहें फिर क्यों वह कहते हैं बुज़ुर्ग अक्सर, हों जब महफिल में सारे सब अगर मां-बाप अच्छे हों, तरबियत होती अच्छी है तरबियत हो अगर अच्छी, तो फिर बच्चे बुरे कैसे  सही है बात बिल्कुल यह , मगर कुछ हादसे ऐसे हैं  बदल देते जो बातें सब, उसे ही दोष कहते सब  चुना उसको तरबियत देख, मगर निकला भ्रम यह तो  बिताना सारा जीवन अब, हंसी हो या दुखी हो वह खुशी उसको बहुत है अब, मिला उसको है जब से वह  ना वह उसको खुशी देती, यही तो दुख सभी को है  नहीं यह दोष किसी का भी, इसे कहते हैं किस्मत वह लकीरें जो हैं हाथों में, उसे कहते हैं किस्मत सब  लकीरें तो हमें दिखती, मगर दिखती नहीं किस्मत  लकीरें जो बनाते हैं, उसे कहते हैं कुदरत हम  सभी कुछ सोच लेते हम, सभी ...

6 Line Poetry | Page 2 | Little_Star | 6 Line Best Poetry | Best Poetry

🖊️  वह देर से उठती सोकर यह चर्चा है हर तरफ  आदत नहीं यह अच्छी यह जानती है वह भी वह सारी रात जगती आती ना नींद उसको यह बात सिवाय उसके नहीं जानता है कोई  हर दर्द बताएं सबको ज़रूरी नहीं है दोस्त कुछ ज़ख्म दिल के तन्हा सहना भी है ज़रूरी 🖊️   वह शख्स है गलत, करता है सब गलत  दिल देखने की फुर्सत, किसको यहां पर है देखे है आंख जो कुछ, सच है वही सही है  वह एक गुनहगार बंदा, हो सकता है फरिश्ता  छूटे जमाअत उसकी, यह जानते सभी हैं  तहज्जुद है कितनी छूटे, यह जानता खुदा है    🖊️   मुहब्बत भी क्या है जो मुहब्बत छूट जाती है बहुत अपने जो थे हर दम वही अब हो गये अंजान  मुहब्बत तो इबादत है अदा जो हम सब करते हैं  मुहब्बत बन गई नफरत मुहब्बत हो गई उसको  हर एक अपने लगे दुश्मन अज़ीज़ अब हो गया कोई  जो अपनों को बना दे गैर मुहब्बत वह नहीं होती 🖊️  मां के एक दर्द को समझ सके ना वह बच्चे   मां जो हर दर्द को समझ लेती थी बच्चों के  बेटा बड़ा होकर समझता है बड़ा खुद को बूढ़ी वह मां बहुत ही नासमझ है अब तो कल तक सिखाती...

अनजानी ख्वाहिश | महफिल की चमक और दिल की तन्हाई | Unspoken Desires: The Glow of Celebrations and the Solitude of a Mother

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झिलमिलाती रौशनी और हसीं चेहरे बहुत दिल में कितनी रौशनी यह नहीं दिखते यहां..... अंजानी ख्वाहिश..... वह सजती है संवरती है, लगाती है वह झूमर भी  पहनती है वह कपड़े सब, गरारा हो शरारा हो  हंसी और खुशी सब ही दिखती है सभी उस की  मगर वह दुख जो अंदर है नहीं दिखता कहीं पर भी  बना दुल्हा अज़ीज़ बेटा भरी महफिल हंसी चेहरे  मगर वह एक चेहरा जो यहां होता नहीं है वह  सजी संवरी अकेली मां यहां सब कुछ संभाले है  कभी चाहत यह दिल में थी बने दूल्हा मेरा बेटा  मगर अरमान दिल के सब नहीं होते यहां पूरे  हज़ारों ख्वाब बुनते हम ना जाने क्या-क्या सोचते  मगर कुछ पल कभी हमको बहुत मजबूर कर देते  जिसे कहते हैं कुदरत हम किस्मत वह लिखे ऐसी  जिसे सपने में सोचा ना नहीं चाहा कभी दिल ने  जवां बेटा बना दूल्हा नहीं है साथ वहां पर बाप  अकेली मां करे है याद मगर ताबिश नहीं कोई   चली है ज़िन्दगी सब की नहीं रूकता यहां कुछ भी   मगर हर पल यहां दिल में बहुत कुछ टूट जाता है   चमकती रात सजी महफिल हर एक चेहरा यहां चमके   मगर वह एक...

बिखरा आसमां | Sad Poetry | AG |

  बिखरा आसमां...... गमों के दर्द भरे लम्हे   वह खामोश आंखें और अल्फाज़ बिखरे सुबह-शाम वह ही  रूका था ना कुछ भी ना छूटा था खाना  पिया उसने चाय भी मिली सबसे हंसकर  और खैरियत भी जाना  सुनाया ना अपनी  सुना मगर सब की  छुपाया हर एक दर्द ना जाना किसी ने  बहुतों नें समझा  नहीं दुख है इसको  मगर कुछ थे ऐसे  समझ वह गये थे  जो दिख वह रही है  वह है झूठ सब ही  हंसी और खुशी सब  दिखावा है उसका  बहुत दिल है टूटा  बहुत ज़ख्म दिल में  छिपा वह गयी है  अंधेरी बहुत रात  वह नन्हा सितारा बहुत तन्हा-तन्हा  -Little_Star  

4 Line Poetry | Page 5 | قطعہ | Little _Star

अनकहे लफ्ज़....  🖊️  भाई बहनों का प्यार खत्म होता है कहां  दूर हो जाते सब दिल मगर करता है याद भूल जाए जो जब भाई और बहन कभी  ऐसा मुमकिन नहीं इस ज़िन्दगी में अभी  🖊️  बाप बन कर है यह जाना बाप होता है क्या  वरना एक बेटा क्या समझता कभी बाप को हर एक दुख दर्द पता चल गया है बेटे को बेटा जब बड़ा होकर बाप बन गया   🖊️  बेटे और बेटी में फर्क है बहुत  एक बेटे ने यह बात तब है कही  जब बना बाप एक बेटी का वह  सारे फर्क उसको समझ आ गये  🖊️  मां मैं बच्चा नहीं अब बड़ा हो गया तेरा समझाना हर दम यह अच्छा नहीं है समझ है बड़ी और अब मैं भी बड़ा  मां बड़ी अब कहां और वह बच्चा कहां  🖊️  मां-बाप पाल लेते हैं बच्चों को उम्र भर  खुशियों को अपने छोड़ के देते वह हर खुशी  मुश्किल ना हो कोई भी बच्चों को ज़िन्दगी में  बूढ़े हैं अब वह मां-बाप बच्चे मगर ना कोई साथ  🖊️  पढ़-लिख तो गये बच्चे मगर अब भी कमी है कुछ बात है यह ऐसी खलती जो बहुत है  तालीम तो दिला दी पैसे से महंगी महंगी  तरबियत मगर राहों ...

सितारा | Best Poetry | Poetry | Star | Little_Star

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सितारा.... ज़िन्दगी थी कभी अब कहानी लगे  वह कहानी अधूरी मुकम्मल कहां   वह कहानी चलो सुन लें एक बार फिर  एक सितारा वह दिलकश चमकता हुआ  भीनीं गजरों के जैसा महकता हुआ  चांदनी रात मानिंद चमकता हुआ   हर एक अंदाज़ उसका हसीं था बड़ा  और सजने संवरनें की क्या बात थी   रची मेहंदी वह हाथों में दिलकश सजी थी रहती बालियां वह कानों में दीपक लिए खनकती चूड़ी खनकती रहती वह हाथों में   दमकती बिंदी गले में लाकेट,  नज़र हटे ना जो जाए उस पर चमकती नथ बनी हीरा, सजी रहती वह चेहरे पर   और वह पाज़ेब पैरों में, कदम उठते छन्न छन छन वह पल्लू शान से सिर पर, चहकते लब हंसी चेहरा  और वह बाल संवरे से, अदब से बोलना और वह   गज़ब हाज़िर जवाबी थी, ना जाने कब कहां से एक    आया था वह झोंका एक, वह झोंका एक तूफां का  मिनट का खेल कुदरत का, और फिर मिट गया सब कुछ   मुहब्बत की वह मारी थी, मुहब्बत की वह रानी थी  मुहब्बत मिल गई उसको, मुहब्बत जी रही थी वह मुहब्बत में दीवानी वह, मुहब्बत मिट गई लेकिन  दमकती थी...

ख्वाहिश |

ख्वाहिश.....   जो सोचा सब अदा करके फर्ज़ वह सब जो था हम पर  चलो कुछ पल साथ बैठेंगे और कुछ लम्हे बिताएंगे बिताएंगे बहुत तन्हा जहां कोई ना हो अपना  ना हो कुछ भी अधूरा सा मुकम्मल सब जहां पर हो   जहां हो बात सिर्फ वह ही हमारी और तुम्हारी जो  मुहब्बत हो हर एक लम्हा  ना फिक्र हो वहां कोई  हर एक ज़िम्मेदारी अदा कर के  हर एक रिश्ता निभा कर के  चलो कुछ पल गुज़ारें हम  हर एक गुज़रे ज़माने के  वह मुश्किल और परेशानी सभी कुछ काट कर और फिर निभा कर  बहुत खुश और शादमां दिल है जो सोचा था गले मिल कर  कुछ पल साथ बिताएंगे  मगर हर एक ख्वाहिश फिर बना एक ख्वाब ऐसा वह हकीकत कुछ नहीं लेकिन मगर उस ख्वाब को अब ही  बनाना ज़िन्दगी हमको  गुज़रे रात-दिन ना ही  गुज़ारना फिर भी हमको है अंधेरी रात ना चमके चांद  मगर नन्हें सितारे ऐ  तुझे फिर भी चमकना है तुझे फिर भी चमकना है।  -Little_Star

कहानी याद आती है | Abandoned by Their Own – A Poem on Parents’ Loneliness | अपनों द्वारा छोड़े गए – मां-बाप की तन्हाई पर एक कविता | Best Poetry | Story

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  कहानी याद आती है.... बड़े हो जाते हैं हम सब जब, बदल जाता बहुत कुछ है  मगर कुछ बात रहती हैं, हमेशा याद रहती वह कभी फुर्सत से बैठें जब, वह बातें याद आती हैं कहानी बन चुकी है जो, कहानी याद आती वह  ज़िन्दगी याद आती वह, ज़िन्दगी याद आती वह मेरा प्यारा सा वह एक गांव, मेरे गांव का वह एक घर   भरा-पूरा घराना था, पति-पत्नी और बेटे चार  और एक बिटिया वह प्यारी सी   मुहब्बत से भरा वह घर, खुशी थी शादमानी थी  बहुत आसाईश भले ना थी, सुकून लेकिन वहां पर था  पिता और मां दोनों ही, कमाते घर चलाते थे  खर्चा घर का चल जाता, मगर पैसे ना बचते थे  ना झगड़ा था ना किच किच थी, सुकूं लेकिन वहां पर था  बड़े होते वह बच्चे और, बढ़ी फिर ज़िम्मेदारी भी  हुई एक-एक की शादी फिर, बहु आई दामाद आये  चला फिर सिलसिला यूं ही, बढ़ी फिर ज़िंदगानी वह किलकारी गूंज उठी फिर, वह नाती और पोतों की  बढ़े खर्चे कभी किच-किच, कभी कुछ बात लगी रहती  मगर इन सब ही बातों में, मुहब्बत फिर भी थी कायम  सभी मिलकर ही रहते थे, वह खाना साथ ही पकता  और खाते साथ...

सिपाही | Poetry | AG | दिल को छू लेने वाली

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  सिपाही.... सिपाही एक मरता है ना जाने जीते कितने हैं    ना जाने कितने मरते हैं मगर उस एक मरने से  कोई बेटा है खोता तो कोई खोता यहां है भाई  किसी की मांग उजड़ी तो किसी ने बाप को खोया  बहुत रिश्ते यहां पर हैं हर एक रिश्ता बहुत तड़पा  दुखी तो हैं यहां सब ही मगर जो गम है बीवी का  समझ सकता ना कोई है नहीं है हल यहां कोई  हर एक रिश्ता अधूरा है हर एक रिश्ता यहां तन्हा  घड़ी भर की तसल्ली और सिसकना ज़िन्दगी भर है सजे मेडल दीवारों पर मगर वह घर बहुत वीरान  खनकते थे हंसी झरने वह अब खामोश है कमरे  सिपाही घर जो आता जब हर एक चेहरा दमकता था  नहीं है आस अब कोई यहां अब कौन आयेगा धड़कते दिल चले सांसें चले है ज़िंदगानी यह मगर उन चलती सांसों को सम्हालना है बहुत मुश्किल  चले है ज़िन्दगी सबकी रूके ना सुबह-शाम कुछ भी  मगर इन चलते लम्हों में बहुत कुछ टूट जाता है  बहुत कुछ रूठ जाता है बहुत कुछ छूट जाता है   वह एक सैनिक के मरने से हज़ारों बच तो जाते हैं  मगर उस एक सैनिक से बहुत से दिल धड़कते थे  हर एक सोचे यदि...

जलता दिया | Flickering Flame: A Story of Loss and Resilience |Little _Star | ऐसी बेहतरीन नज़्म जो शायद ना पढ़ा हो आपने

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जलता दिया..... कहते हैं जिसे दूल्हा, और सर का ताज सब  वह ताज जो टूटा तो, बिखरे फिर बहुत हम  ख़ामोश लब बहुत और, आंख की नमी वह  दिल का वह तुकड़ा रेज़ा, रेज़ा बहुत हुआ  गुज़रे दिनों की याद, आंखों में आ गयी  हर एक लम्हा गुज़रा, तेरे साथ याद में अश्कों से चेहरा तर है, और खामोश है जुबां हर याद है तेरी साथ, मगर साथ तू नहीं वादा वह करता साथ का, तन्हा मगर वह कर गया  वादा वह ज़िन्दगी का, और ज़िंदा नहीं है वह  जाने ना दूंगी तुझको, आसानी से इतना हमदम ऐसा वह मेरा कहना, और फिर वह एक पल तन्हा चला गया वह, और तन्हा फिर रह गये हम एक लफ्ज़ ना निकला मुंह से, खामोश हो लिये टूटा वह दिल कुछ ऐसे, कि चूर-चूर हो गया  तुकड़ा हर एक दिल का, और दिल में सजा लिया   अश्कों को यूं सजाया, अंदर ही अंदर अपने  मानो वह जैसे मोती, हो कीमती बहुत ही  मसरूफ हो गये हम, हर पल कुछ ऐसे जैसे   फुरसत से बैठे गर तो, फांसी मिले सज़ा में   नन्हा सा एक दिया मैं, कहता वह जिसको अंजुम जलता था जो फलक पर, तारों की तरह हर दम मिट अब रहा दिया वह, अंदर ही अंदर जल कर...

दर्द | Little _Star | Sad Lines

♥️ बड़ी खुशी मगर दुख के साथ एक महफ़िल सजायी थी  तेरे नाम के साथ  महफ़िल तो सजी थी  क्या खूब सजी थी  ऐ दोस्त! मेरे बेटे  मगर तेरी कमी थी।  सलमान रागिब के इन्तेकाल के बाद उनके वालिद शाद अब्बासी साहेब ने एक प्रोग्राम रखा था। उस वक्त शाद अब्बासी साहेब को देख कर मन में बेसाख्ता यह ख्याल आया।  -Little_Star

बेताब लम्हें | यंग लड़ियों की पहली पसंद| Little _Star

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बेताब लम्हें... दिल ओ जां से भी ज़्यादा  रगे दिल के बहुत ही पास  वह एक बंदा प्यारा सा   किसी रिश्ते के रिश्ते से  वह आया था मेरे घर पर  वह शादी थी बहन की जो  अटेंड करने वह आया था  दिखे जब भी वह शादी में  वह फिर आंख चमक जाए  और दिल भी मचल जाए  आ जाए लबों पर फिर  वह एक मुस्कान धीमी सी  और वह सुर्ख आरिज़ को  छुपा पाना हो मुश्किल जब  वह जुमलों की बयां बाज़ी  और वह शोखियां लब पर  हंसी झरना लबों का वह  और हाज़िर जवाबी वह    मुहब्बत की निशानी सब  मुहब्बत हो गई मुझको मगर अंजान बंदा वह  और मैं नादान सी बंदी  मुहब्बत को ना समझे वह  जता मैं भी ना पायी थी   सितम उस पर दिखे हर दम  नज़र अपनी झुका तो लूं  मगर बेताब यह धड़कन  कदम बहके, उठे चिलमन  बिना देखे ना चैन आये  जो देखूं एक नज़र उसको  नज़र फिर बार-बार उठती   बहुत अंजान बनता वह मगर अंजान नहीं है वह  अट्ठारह साल की मैं बंदी  समझ इतनी तो है मुझ में  मुहब्बत को वह समझे...

Namakpara | टमाटर चाट | पापड़ी चाट | Tips And Tricks | Tamatar Chat Trick | नमकपारा | Tricks

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अक्सर हम बहुत सारी चीज़ें बनाना तो चाहते हैं। लेकिन हम समझ नहीं पाते की कितना बनाए। उसके वज़न का हमें अंदाज़ा नहीं रहता है। हम डरते हैं कि कहीं बहुत ज़्यादा या कम ना हो जाए।  इसी के मद्देनज़र आज हम नमकपारा( नमकीन) बहुत जगह इसको सकरपारा भी कहा जाता है। नमकपारा और पापड़ी की सामग्री यहां पर दिये जा रहे हैं। जिससे आप समझ लें की आप को कितने वज़न की ज़रूरत है। और आपको कितना बनाना है।  यहीं पर आपको टमाटर चाट की फटाफट रेसिपी भी दी जा रही है। जिसके जरिए आप टमाटर चाट को आसानी से बना और खा सकते हैं। वैसे तो टमाटर चाट बाज़ार में भी मिल जाता है। लेकिन कभी-कभी अपने हाथों का घर पर बना हुआ टमाटर चाट खाने का मन करता है। कभी आपका टमाटर चाट खाने का मन करे तो आप घर पर टमाटर चाट ज़रूर बनाएं। और सबको खिलाएं। 🌶️  नमकपारा...  सामग्री:-  650 ग्राम मैदे से नमकपारा बनाने पर तैयार नमक पारे का वज़न 683 ग्राम होता है।   🌶️  पापड़ी....   सामग्री:- मैदा सूखा  250 ग्राम  मैदा गूंधने के बाद  395 ग्राम   पापड़ी तैयार 419 ग्राम   🌶️...

बूढ़ा बचपन | Part 10 |

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  बूढ़ा बचपन ..... मुहब्बत भी क्या चीज़ है। यह कभी अपनों को गैर बना देती है। तो कभी गैरों को अपना बना देती है। जन्म देने वाली मां बुरी हो जाती है। ब्याह कर लाई हुई बीवी अच्छी हो जाती है।  रिश्तों को निभाना हर एक को ज़रूरी होता है। घर परिवार एक स्टेज शो की तरह होता है। जहां हर किसी को अपना किरदार निभाना होता है। अगर हर कलाकार अपना किरदार अच्छे से निभा ले तो शो हिट हो जाता है।  ज़िन्दगी के बेहतरीन दिनों को जीते हुए वह परिवार बहुत खुश था। शायद वहां कोई गम नहीं था। या फिर उस परिवार के लोगों को ज़िन्दगी जीने का सलीका पता था।  कभी-कभी इंसान की समझ काम नहीं आती या फिर यूं कह लें कि किस्मत साथ नहीं देती।  कहानी याद आती है...... खुशियों से भरे पूरे घर में उस वक्त अफसोस के नोहे गाये जाने लगे। जब घर में नई बहू के आते ही घर का माहौल बदलने लगा। आप लोग दिन में दाल खाते हैं? हमारे घर में तो रात को दाल बनती है।  आप लोग कितना मीठा खाते हैं। हमारे यहां कोई मीठा आ जाए तो पड़ा-पड़ा खराब हो जाता है। कोई खाता ही नहीं है।  मुझे नाश्ते में अंडे खाना पसंद है। और आप के यहां तो ...

छोटी-छोटी बातें, बड़े एहसास – रिश्तों की अनमोल कहानियां | 100 word's | Small Moments, Big Emotions – Stories of Relationships

  आनलाइन मैकज़ीन के लिए लिखा गया यह लेख। जो 100 शब्दों में लिखना था। टाईटल उनका था। लेख प्रकाशित हुआ।  -Little _Star 🖊️ प्लीज़ आप या तो टीवी बंद कर दीजिए या फिर यह न्यूज़ चैनल बदल दीजिए। सुनिधि ने बहुत ही उलझे मन से अपने पति परेश से कहा।  क्यो यह अचानक से तुम्हें क्या हो गया? मैं तो रोज़ ही न्यूज़ देखता हूं।  परेश ने सवालिया निगाहों से सुनिधि की तरफ देखा।  रोज़-रोज़ आप यह न्यूज़ चैनल देखते हैं। और हर न्यूज़ चैनल पर  हत्या, बलात्कार, लूटमार और अश्लील फिल्मों की बातों के सिवा कुछ सुनाई या दिखाई ही नहीं देता। इसलिए  रोज़ रोज़ ये सुनकर मैं परेशान हो जाती हूं।  टीवी बंद हो चुकी थी। क्योंकि बात बिल्कुल सही थी।  🖊️ रोज़-रोज़ ये सुनकर मैं होती उदास बहुत मैं हूं बेटी हो तुम इस घर की बेटा बनो ना हम दम तुम रोज़ रोज़ ये सुनकर मैं सोचती मैं यह हर दम हूं  बेटी हूं मैं बेटा नहीं क्यूं सोच यह मुझको आती है। 🖊️ फुहार मुहब्बत भरी..... ठक ठक... क्या हुआ भाभी जी? रेवती ने आंख मलते हुए दरवाज़ा खोला और सामने खड़ी जेठानी से सवाल किया।  उठे देवरानी जी, स...

ऐ जाते हुए साल | Aey Jaate Hue Saal | New Year | Happy New Year | Little_Star

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ऐ साल.....  तेरा आना मुबारक था, तेरा जाना है दुखदाई  मिले हम थे हो जैसे कल, मगर था वह एक साल    ऐ साल! हर साल की तरह तुम भी जा रहे हो। हर साल के आते ही मन में एक उमंग और उत्साह आ जाता था कि इस साल हम कुछ नया करेंगे। या फिर हम यह सोचते कि हम यह करेंगे हम वह करेंगे। मगर....  ऐ साल! तेरे आने के बाद धीरे-धीरे हम वापस अपनी पुरानी ज़िन्दगी में लौट जाते हैं। हमारा जोश और जुनून धीरे धीरे कम होता जाता है। और हम भूल जाते हैं कि हमने किसी से कोई वादा किया था।  ऐ साल! हम तुझ से क्या हुआ वादा भूल जाते हैं।   ऐ साल! आज तू हमें छोड़ कर जा रहा है तो हमें अफसोस हो रहा है। हम सोच रहे हैं कि काश हमने तेरी कद्र की होती। तेरे साथ अच्छा वक्त गुज़ारा होता।   ऐ साल! तेरे साथ रहकर हम बहुत कुछ अच्छा कर सकते थे। मगर हम नादान थे। आज हमें अपनी ग़लती का एहसास हो रहा है। मगर....  ऐ साल! हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि....  ऐ साल! तू अब हमसे बिछड़ रहा है। तेरे जाने का वक्त आ गया है।  ऐ साल! हम इस उम्मीद के साथ तुझ से बिछड़ रहे हैं कि हर आने व...