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धड़कन | भाग 28 | Dhadkan Part 28 | Heart Touching Hindi Love Story

शिवाय ऊपर जाते हैं। श्लोका का रूम बंद था। वह सीधे अपने रूम में गये। और अपना सामान निकाल कर पहले पैकिंग की। फिर चेंज करके सो गए। शिवाय इस वक्त कुछ भी सोचना नहीं चाह रहे थे। वह सिर्फ श्लोका के साथ जाना चाह रहे थे। सुबह श्लोका तैयार हो कर नीचे गई। वहां पर कोई नहीं था। वह सीधे बाहर चली गई। शिवाय अपनी गाड़ी में बैठे उसका इंतेज़ार कर रहे थे। आप इतनी सुबह कहीं जा रहे हैं? श्लोका शिवाय को देख कर हैरान हुई।  हां....  मैं भी गांव जा रही हूं। अभी तक ड्राइवर नहीं आये। श्लोका इधर उधर देख कर कहती है। आ जाओ। मैं ही चल रहा हूं। शिवाय ने गाड़ी की तरफ इशारा किया। लेकिन आप क्यों? मैं ड्राइवर के साथ चली जाऊंगी। मुझे आज वापस नहीं आना है। श्लोका को लगा शिवाय को पता ना हो। मुझे पता है। आओ जल्दी बैठो।  लेकिन.... अब आओ भी। नहीं आप मत चलें। श्लोका ने मना किया। मैं चल रहा हूं।  श्लोका खामोशी से बैठ गई। उसे और कोई रास्ता नहीं दिखा। शिवाय ने गाड़ी स्टार्ट कर दी। आप क्यों चल रहे हैं? श्लोका को समझ नहीं आ रहा था कि शिवाय क्यों चल रहे हैं। क्यों मैं नहीं चल सकता? चल सकते हैं लेकिन..... क्या लेकिन? ...

धड़कन | भाग 27 | Dhadkan Part 27 | Heart Touching Hindi Love Story

कब से शिवाय बैचैन थे। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इतनी बेचैनी क्यों है। और जब कुछ समझ नहीं आया तो वह श्लोका के रूम में चले गये थे। श्लोका दुखी थी इस लिए मुझे इतनी बेचैनी थी।  ऐसा कैसे हो सकता है। शिवाय उसी पर गौर कर रहे थे। मैं इतनी ज़्यादा उससे मुहब्बत करने लगा हूं कि उसके दर्द मेरे दिल तक पहुंच रहे हैं। इन्हीं सोचों के साथ शिवाय सो गये। श्लोका को कालेज नहीं जाना था। उसे अपने प्रोजेक्ट पर काम करना था। वह नाश्ते के लिए नीचे गई। थोड़ी देर में शिवाय और सुधीर जी भी आ गये। उसी वक्त अराध्या भी आ गई। क्या बात है आज सूरज किधर से निकला है? शिवाय हंस कर अराध्या से पूछते हैं। सूरज को आज दूसरी तरफ से निकलने का मन कर रहा था। अराध्या ने भी मस्ती से कहा। श्लोका भी मुस्कुरा दी। उसे अच्छा लगा। सब लोग साथ में नाश्ता करने लगे। साथ ही शिवाय और सुधीर जी अराध्या को परेशान भी कर रहे थे।  अगर आप लोगों को इतनी ही दिक्कत है तो फिर ठीक है मैं अब कल से आप लोगों के साथ ब्रेकफास्ट नहीं करूंगी। अराध्या ने नाराज़गी से कहा। ओह माई गॉड.... अब रोज़ सुबह-सुबह तुम को झेलना पड़ेगा। मुझे लगा सिर्फ आज ही। शिवाय...

धड़कन | भाग 26 | Dhadkan Part 26 | Heart Touching Hindi Love Story

मतलब आप अपने बेटे पर मुझे ज़बरदस्ती थोपेंगे? श्लोका ज़ख्मी नज़रों से सुधीर जी को देखती है। नहीं बेटा ऐसा नहीं है। तुम एक खूबसूरत पढ़ी-लिखी लड़की हो। तुम उसको ज़रूर पसंद आओगी। मैं जानता हूं उसे। सुधीर जी उसे मनाने में लगे थे। लेकिन फिर भी  मैं नहीं चाहती कि आप का बेटा किसी वादे पर कुर्बान हो। श्लोका अपनी बात पर कायम थी। तो फिर तुम क्या चाहती हो? तुम मेरे साथ नहीं चलोगी? तुम यहीं रहोगी?  सुधीर जी हार मानते हुए कहते हैं। मैं आप के साथ चलूंगी। लेकिन आप वहां पर किसी को भी अपने वादे के बारे में नहीं बताएंगे। अपने बेटे को भी नहीं। मैं वहां पर एक गांव की लड़की बन कर जाऊंगी। अगर आप के बेटे ने मुझे स्वीकार कर लिया तो ठीक है। वरना फिर कोई वादा याद नहीं रखा जायेगा। लेकिन कन्हैया ने तो बताया था कि तुम पढ़ी-लिखी हो। सुधीर जी को हैरानी हुई। हां बाबा ने सही बताया था। मैं आप के शहर से ही पढ़ी हूं। इस वक्त मैं पी-एच-डी कर रही हूं। और साथ ही साथ यूनिवर्सिटी में पढ़ाती भी हूं। इस के इलावा मैंने फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा किया है। और भी बहुत कुछ है जो मैं पढ़ चुकी हूं। मैं खेती-बाड़ी भी कर सकती ह...

डोर धड़कन से बंधी | भाग 92 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 92 | Hindi Romantic Story

यह मेरी तो कुछ नहीं लगती, ना रिश्तेदार ना ही दोस्त… फिर मैं क्यों यहां हूं? ठीक है उसकी मां की तबियत खराब हुई। एडमिट करा दिया, बात खत्म।  जा रहा हूं मैं…प्रेम एक झटके से उठता है। और कहते ही बाहर निकल जाता है।  और नताशा हैरान खड़ी रह जाती है।  मेरे रवैए से आप को तकलीफ हुई। उसके लिए सॉरी…मैं नहीं चाहती कि कोई हमारी ज़िन्दगी में आए। हम मां-बेटी अकेले है, मगर खुश हैं। हम अपनी ज़िन्दगी में किसी ऐसे इंसान को आने की इजाज़त नहीं दे सकते कि जिसके जाने पर हमें दुख हो। नताशा अपनी जगह खड़ी सोचती रह गई। ♥️ अलग-अलग गाड़ियों में सब का सामान रखा जा रहा था। आज सब को जाना था। शिवाय का सामान भी गाड़ी में रखा जा चुका था। बाहर लॉबी में बैठे शिवाय यूं ही इधर-उधर देख देख रहे थे। तभी उन की नज़र दूर खड़ी मिसेज अग्रवाल पर पड़ती है। जो किसी से बात कर रही थी। उस रात के बाद मिसेज़ अग्रवाल उन के पास नहीं आईं। लेकिन आते-जाते शिवाय उन को अलग-अलग लोगों के साथ देख चुके थे। शिवाय उन के बारे में कुछ और सोचते उस से पहले ही मिसेज अग्रवाल उन को देख कर हाथ हिला कर हाय करती हैं। और उनकी तरफ बढ़ जाती है। अब यह मे...

डोर धड़कन से बंधी भाग | 91 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 91 | Hindi Romantic Story

कौन हमें क्या समझता है। हमारे लिए यह मायने नहीं रखता है। हम क्या हैं… हमारे लिए यह ज़रूरी है। आप ने जो किया वह गलत किया या सही… इस का फैसला तो मैं नहीं कर सकता। लेकिन मैं इतना ज़रूर कहूंगा कि हम कोई ऐसा काम ना करें कि एक वक्त के बाद हमें खुद पर ही पछताना पड़े। अपनी बात कह कर शिवाय अपनी जगह से उठ गए। जैसे अब आप जा सकती हैं। जाने से पहले एक बात पूछना चाहती हूं… वह भी उठ खड़ी हुई।  शिवाय उस की तरफ देखने लगे। क्या आप ने कभी अपनी पत्नी को धोखा दिया है?  मैं अपने सही होने की गवाही किसी गैर को देना पसंद नहीं करता। और हम पति-पत्नी को एक दूसरे को सही होने का कभी सबूत नहीं देना पड़ा। पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार से पहले विश्वास ज़रूरी है। आप एक-दूसरे से लाख प्यार करते हों। मगर आप को एक-दूसरे पर विश्वास नहीं है तो आप का प्यार दो कौड़ी का भी नहीं है। शिवाय बहुत ही सख्त अल्फाज़ में अपनी बात कहते हैं। खुशनसीब है आप की बीवी जिसे आप जैसा पति मिला। मिसेज अग्रवाल मुस्कुरा कर कहती हैं। खुशनसीब तो मैं हूं कि मुझे ऐसी पत्नी मिली जो मुझे सही साबित करने के लिए खुद गलत नहीं होगी। बल्कि वह सही रहकर म...

धड़कन | भाग 25 | Dhadkan Part 25 | Heart Touching Hindi Love Story

हां ठीक है। लेकिन अब तुम देर मत करो। कहीं ऐसा ना हो कि सही वक्त के चक्कर में बहुत देर हो जाए। सुधीर जी उसे समझाते हैं। जी अंकल ठीक है। अब मैं जा रही हूं।  ठीक है जाओ। और ज़्यादा कुछ सोचना मत। श्लोका जवाब देने के बजाय सिर्फ मुस्कुरा दी। और ऊपर चली गई। रूम में जाकर वह वैसे ही लेट गई। उसे अपने बाबा और उनकी बातें याद आ रही थी। और अपनी वह बातें जिस से उसने खुद को बांध रखा था। श्लोका सोचते हुए दूर बहुत दूर अपने गांव पहुंच गई। ❤️ बाबा आपने सुधीर अंकल को क्यो बुलाया? क्या ज़रूरत थी। श्लोका बाबा पर नाराज़ होती है। ज़रूरत थी बेटा तभी बुलाया है। पता नहीं मैं कितने दिन का मेहमान हूं। तुम्हारे बारे में सोच लूं तो मैं इत्मीनान से मर सकूंगा। आप को कुछ नहीं होगा आप ठीक हो जायेंगे। लेकिन ठाकुर साहेब उसकी बात का जवाब देने के बजाय अपनी बात कहते रहे। तुम तो जानती हो सुधीर मेरा बचपन का दोस्त है। सुधीर के पिता जी बचपन में ही शहर जा बसे। और हम लोग यहीं रह गये। वह लोग जब भी गांव आते मिलते ज़रूर थे। और फिर वह लोग अपना सब कुछ घर और खेत सब बेच कर शहर चले गए। मैं जब भी शहर गया। उन लोगों से मिला। लेकिन इधर बहु...

धड़कन | भाग 24 | Dhadkan Part 24 | Heart Touching Hindi Love Story

आयें ना भाई। बहुत मज़ेदार फिल्म है। अराध्या ने शिवाय से कहा। शिवाय वहीं बैठ गये। और श्लोका की तरफ देखा। शिवाय कल रात वाली बात भूले नहीं थे। श्लोका को भी याद आ गई। सब की नज़र स्क्रीन पर थी। देखते-ही-देखते एक रोमांटिक सीन आ गया जिस में हीरो हीरोइन को प्रपोज कर रहा था। शिवाय एक टिक देखते गये। ऐसा लगा वह उसी में खो गये हो। शिवाय की नज़र में हीरो हीरोइन नहीं बल्कि वह और श्लोका थे। शिवाय ने तिरछी नजरों से श्लोका की तरफ देखा। उसकी नज़र स्क्रीन पर थी। शिवाय ने सोफे पर पीछे सिर टिका कर आंख बन्द कर ली। उसके कानों में फिल्म के डायलाग बज रहे थे और बन्द आंखों में श्लोका थी। क्या हुआ भाई थक गये हैं क्या? अराध्या शिवाय को इस तरह बैठे देख प्यार से पूछती है। हूं बहुत ज़्यादा، शिवाय तो कहीं और ही गुम थे। श्लोका ने भी शिवाय की तरफ देखा। शिवाय उसे बहुत उदास दिखे। कमला, भाई के लिए चाय लायें। अराध्या ने वहीं से आवाज़ दी। चाय पीते ही शिवाय उठ कर ऊपर चले गए। क्या मेरी बात से परेशान हैं? श्लोका मन ही मन सोचने लगी। और फिर फिल्म देखने लगी। इस वक्त वह कुछ सोचना नहीं चाह रही थी। डैड कहीं घूमने चलते हैं। बहुत दिन ह...

धड़कन | भाग 23 | Dhadkan Part 23 | Heart Touching Hindi Love Story

श्लोका चेंज करके बालकनी पर चली गई। शिवाय वहां नहीं थे। उस ने सुकून की सांस ली। इस वक्त वह परेशान थी। अंकल की बातों पर गौर कर रही थी। लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसी वक्त शिवाय भी आ जाते हैं। हाथ में दो मग था। एक श्लोका की तरफ बढ़ा दिया। जिसे उसने खामोशी से थाम लिया।  क्या सोच रही हो? शिवाय उस के चेहरे को देख कर पूछते हैं। जो इस वक्त सच में सोचनीय लग रहा था। है कुछ सोच। श्लोका ने सोचते हुए कहा। मुझे बता दो, हो सकता है हल निकल आये। शिवाय ने प्यार से कहा। हूं मैं भी यही सोच रही हूं। लेकिन फिर सोचती हूं आप यकीन के काबिल हैं या नहीं। श्लोका अभी भी चिंतित थी। ऐसी क्या बात हो गई कि तुम इतना सोच रही हो। शिवाय को फिक्र हुई।  बोलो क्या बात है। मुझ पर भरोसा कर सकती हो। शिवाय भी सोचने लगे कि ऐसी क्या बात हो गई जो यह इतना फिक्रमंद है। श्लोका वहीं चेयर पर बैठ कर कॉफी पीने लगी। शिवाय भी खामोश रहे। कॉफी पीते ही वह उठ गई। कॉफी के लिए शुक्रिया। अब सोने जा रही हूं। श्लोका ने नार्मल लहजे में कहा। और वह बात?  फिर कभी। तुम ठीक हो ना? जी, लग नहीं रहा। श्लोका मुस्कुरा दी। मुझे यह झूठी मुस्क...

धड़कन | भाग 22 | Dhadkan Part 22 | Heart Touching Hindi Love Story

वह तो शुक्र है कि डैड ने तुम्हारे बारे में पता लगवा लिया। वरना मैं तो शादी के बाद अपना सब कुछ तुम्हारे नाम करने वाला था। इतनी मुहब्बत करता था मैं तुमसे। आलोक ने गुस्से से कहा। शांत हो जाओ बेटा। अशोक जी से अपने बेटे की तकलीफ देखी नहीं जा रही थी। इंस्पेक्टर साहेब गिरफ्तार कर लें इसे। अशोक जी ने इंस्पेक्टर साहेब ने कहा। तुम्हारा पति कहां है? इंस्पेक्टर साहेब ने गुस्से से पूछा।  सिमरन ने देखा अब बचना मुश्किल है उसने पता बता दिया। इंस्पेक्टर साहेब ने तुरंत फोन करके उसे पकड़ने का आर्डर दिया। अच्छा अब हम लोग चलते हैं। इंस्पेक्टर साहेब ने कहा। ऐसे कैसे जायेंगे। डिनर करें पहले। सुधीर जी ने कहा और साथ में शिवाय ने भी कहा। डिनर तो घर जाकर करूंगा। वरना हमारी मैडम गुस्सा हो जायेंगी। इंस्पेक्टर साहेब ने हंसते हुए कहा। इतने बड़े इन्स्पेक्टर होकर बीवी से डरते हैं। शिवाय ने भी मज़ाक किया। बड़ा मैं आप लोगों के सामने हूं। बीवी के सामने उसका हुक्म मानने वाला पति। बीवी को कभी कमज़ोर मत समझना।  इंस्पेक्टर साहेब ने शिवाय के कंधे पर हाथ रख कर कहा। शिवाय सिर्फ मुस्कुरा दिये। उसकी नज़र सीधे श्लोका पर ग...

धड़कन | भाग 21 | Dhadkan Part 21 | Heart Touching Hindi Love Story

  तो क्या? आज तुम्हारे साथ वक्त बिता लेता हूं। फिर तो आफिस ही जाना है। शिवाय श्लोका को देख कर कहते हैं। कहने को तो वह और भी बहुत कुछ कहना चाह रहे थे। कुछ मुहब्बत भरी बातें, कुछ बेताबियां लेकिन वह खामोश रह गये। ना जाने क्यों ऐसा उस के साथ हो रहा है। कहना बहुत कुछ चाहता हूं। मगर कह कुछ नहीं पाता। श्लोका किचन में जाती है फ्रीज खोल कर चेक करती है। बहुत सारा सामान रखा था। वह दूध निकाल कर कॉफी बनाती है। स्नैक्स के साथ कॉफी लेकर वह रूम में जाती है। शिवाय बेड पर लेटे हुए थे।  श्लोका को देख कर उठ जाते हैं। दोनों बातें करते हुए कॉफी पीते हैं। कॉफी पीते ही श्लोका सब लेकर उठ जाती है। सब वहीं छोड़ देना। सफाई वाली आती है सब कर देगी। शिवाय ने उसे बताया तो वह सब रख कर आ गई। वरना वह धुलने जा रही थी। वापस आते ही वह पहले अपना मेकअप साफ करती है। और अपना शरग पहन लेती है।  शिवाय चुपचाप लेट कर कुछ सोच रहे थे।  चलें। शिवाय आंख खोल कर उसे देखते हैं। श्लोका अपने रूप में वापस आ चुकी थी। सादगी में वह और भी हसीन लग रही थी। मेकअप में भी वह बहुत सुंदर लग रही थी। शिवाय मुस्कुरा दिये। तुम हर रूप में...

धड़कन | भाग 20 | Dhadkan Part 20 | Heart Touching Hindi Love Story

  पसंद आया ना रख लो। और यूज़ भी करना। शिवाय श्लोका को देख कर कहते हैं। यह मुहब्बत के किस्से भी अजीब होते हैं। महबूब की हमनशीनी ही चाहता है दिल। अब बताओ नाराज़गी किस बात की थी? शिवाय उसे देखते ही रहते हैं। कुछ नहीं। बताना नहीं चाहती? अब मैं आप को किया बताऊं? आप के दिल में मेरे लिए क्या जज़्बात हैं मैं वह जानना चाहती हूं। लेकिन आप अपने जज़्बात जता कर भी छिपा जाते हैं। ऐसा क्यों यही मैं जानना चाहती हूं।  क्या हुआ क्या सोच रही हो? श्लोका को सोचों में घिरा देख कर शिवाय ने पूछा। कुछ नहीं आप जाएं। श्लोका नार्मल होते हुए कहती है। ठीक है मैं जा रहा हूं। शिवाय जाने लिए मुड़ते हैं। अच्छा सुनो उसमें एक मेहंदी की कोन है उससे हाथ पर लिख लेना। क्या? वही एक दिल और उसमें S.... शिवाय ने मुस्कुरा कर कहा। क्या ज़रूरत थी। थी ज़रूरत..... अभी लगा लेना। नहीं फिर कभी... कल सुबह तुम्हारे हाथ पर लिखा मिले गुड नाइट... कहते ही शिवाय बाहर निकल गए। श्लोका शिवाय की हरकतों पर गौर कर रही थी। और फिर सामान देखने लगी। सारे ही क्लैचर बहुत ही खूबसूरत थे। घड़ी भी उसे बहुत पसंद आई। सामान रख कर वह कल के प्रोग्राम के ब...

धड़कन | भाग 19 | Dhadkan Part 19 | Heart Touching Hindi Love Story

पीकर तो दिखाएं। फिर देखिए मैं क्या करती हूं। श्लोका ने रोब से कहा। और शिवाय उसके इस अंदाज़ पर हंस पड़ा। उसकी सारी टेंशन दूर हो चुकी थी। इस वक्त उस के आसपास सिर्फ खुशियां ही खुशियां थी।  अब मैं जा रही हूं सोने, बहुत थक गई हूं। सिर्फ आप के लिए आई थी क्योंकि मुझे मालूम था कि आज आप सिगरेट ज़रूर पियेंगे। अगर मैं ना आती तो दूसरी भी जल चुकी होती। श्लोका सादगी से कहती हुई वापस घूम गई।   उसके घूमते ही शिवाय ने उसके बाल से क्लौचर निकाल दिया। और उसके बाल आज़ाद होते ही बिखर गए।  श्लोका शिवाय की तरफ देखे बिना आगे बढ़ गई। क्योंकि वह शिवाय की खुशी को अपने दिल में महसूस कर रही थी। और शिवाय वहां खड़ा श्लोका की बातों पर गौर कर रहा था कि वह सिर्फ उसके लिए आई थी। और उसको खुशी देकर चली गई।  मतलब श्लोका सुमन सिंह आप को शिवाय सिंह ओबेरॉय की फ़िक्र है। सोचते हुए शिवाय रूम में जाकर लेट कर भी सिर्फ श्लोका को ही सोच रहे थे। और फिर सोचते हुए वह नींद की आगोश में चला गये। बहुत दिनों के बाद आज वह तीनों एक साथ नाश्ता कर रहे थे।  अरे अम्मा आप कब आईं? शिवाय हैरान होकर खड़ा हो गया। और उन के पास ज...

धड़कन | भाग 18 | Dhadkan Part 18 | Heart Touching Hindi Love Story

 श्लोका अब मुझे डैड से तुम्हारे बारे में बात करनी होगी। अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। और मुझे पक्का यकीन है कि तुम भी मुझे पसंद करती हो। शिवाय ने मन ही मन सोचा। और वापस अपनी जगह आकर काम करने लगे। श्लोका घर पहुंची तो सामने ही सुधीर जी मिल गये। वह उनसे गांव जाने का फाइनल करने लगी। क्योंकि बहुत सारे काम थे जो उसे गांव में अभी करने थे। सब फाइनल करके वह ऊपर चली गई। थोड़ा आराम करके उसने कुछ सामान रखे जो उसे गांव लेकर जाना था। फिर वह आराम करके वापस नीचे चली गई। उसी वक्त अराध्या भी अपने रूम से आई और दोनों बातें करनी लगी। अराध्या ने टीवी चालू कर दिया। फिल्म देखते हुए भी दोनों बातें करती रही। सुधीर जी भी वहीं आकर बैठ गए।  डैड मुझे भी गांव लेकर चलें। मुझे सुमन का घर देखना है। सुधीर जी के आते ही अराध्या ने कहा। सुधीर जी ने श्लोका की तरफ देखा। नहीं बेटा इस बार रहने दो। फिर कभी चलना। इस बार श्लोका को कुछ काम है इस लिए वह तुम को गांव नहीं दिखा पायेगी। सुधीर जी ने बात संभाल ली। ठीक है, लेकिन नेक्स्ट टाइम भूलना मत। अराध्या ने प्यार से कहा। हां ठीक है। श्लोका ने कहा। और वह लोग टीवी देखने ल...

डोर धड़कन से बंधी भाग | 90 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 90 | Hindi Romantic Story

प्रेम जैसे ही उसके पास से हटने लगता है वह उसका हाथ थाम लेती है। और प्रेम हैरानी से उसे देखता है। क्योंकि उसकी आंख बन्द थी। वह धीरे से अपना हाथ छुड़ा कर बगल वाले सोफे पर बैठ जाता है। और उसे देखने लगता है। मुश्किल वक्त में किसी अपने का साथ बहुत ज़रूरी होता है। ऐसा कैसे हो सकता है कि इस का कोई रिश्तेदार ही ना हो…प्रेम की सूई अब इस पर अटकी हुई थी। ♥️ शिवाय का दिन बहुत ही बिज़ी गया। सुबह मीटिंग और उसके बाद उसे कुछ और भी काम था। जिसे करते हुए उसे रात हो गई। होटल पहुंचते ही वह सीधा डाइनिंग ऐरया में चला गया कि डिनर करके तब रूम में जाए। बैठते हुए उस ने यूं ही इधर-उधर देखा। और फिर खाना निकालने लगे।  क्या हुआ मुझे ढूंढ रहे थे? पास से कानों में मिसेज़ अग्रवाल की आवाज़ आती है। इतनी खुशफहमी भी अच्छी नहीं। शिवाय हंसे। यही खुशफमही तो हमें ज़िंदा रखती है। वरना…मिसेज अग्रवाल कहते-कहते बात अधूरी छोड़ देती हैं। लेकिन शिवाय कुछ कहने के बजाए अपने खाने पर ध्यान देते हैं। क्योंकि मिसेज अग्रवाल की आंखें में कुछ और ही दिख रहा था।  डिनर करते ही शिवाय बाहर निकल गए। रुम में जाकर उनको श्लोका से भी बात करने...

डोर धड़कन से बंधी| भाग 89 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 89 | Hindi Romantic Story

मुश्किल वक्त में तसल्ली के दो बोल, किसी अपने का कंधा, कोई हाथ जो मदद को आगे आ जाए। यही तो हैं ज़िन्दगी के असल रंग… ♥️ हॉल में बड़े से गोल मेज़ पर खाना लगा हुआ था। बहुत सारे लोग आ चुके थे। शिवाय भी आकर बैठ जाते हैं। हेलो… शिवाय आवाज़ की तरफ घूमते हैं। बगल वाली चेयर पर दोपहर वाली मैडम बैठी हुई थीं। और मुस्कुरा रहा थी। हाय… शिवाय भी मुस्कुरा दिए। देखिए, हमारी फिर मुलाकात हो गई। एक बार फिर वह मुस्कुराई। मुलाकात तो होना ही था। मिस…शिवाय कहते-कहते रूक जाते हैं। मिसेज़ सोफिया अग्रवाल…वह नाम बताती हैं।  हां तो मिसेज अग्रवाल… अभी पूरे हफ्ता हमारी मुलाकात होगी। क्योंकि हम सब इस प्रोग्राम का हिस्सा हैं। शिवाय सब की तरह इशारा करते हैं।  हां,  मगर फिर भी…कुछ सोच वह मुस्कुराई । डिनर करते हैं। शिवाय खाने पर ध्यान देते हैं।  खाना खाते हुए हर कोई बातें करता रहा।  खाना खाते ही शिवाय उठ कर बाहर की तरफ निकल जाते हैं। आइसक्रीम? मिसेज अग्रवाल एक बार फिर शिवाय के सामने थे। नो थैंक्स…मैं आइसक्रीम सिर्फ अपनी वाइफ के साथ खाता हूं। शिवाय की नज़रों में श्लोका थी। ओह…ऐसा क्या? मिसेज अग्रवाल...