Apple Bite By Little Star | reel | ज़िंदगी और रिश्तों पर दिल छू लेने वाले विचार | Little_Star
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आजकल यही चल रहा है...
समझ नहीं आ रहा कि
Internet Free है
या हम....
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गांधी जी कह गए...
बुरा मत देखो
बुरा मत सुनो
बुरा मत कहो
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ज़िंदगी के दो किरदार...
प्यार और पैसा,
कभी प्यार के लिए पैसा हारा
तो कभी
पैसे के लिए प्यार कुर्बान हुआ।
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ज़िंदगी बहुत मुख्तसर है
इसे बदले, रवैयों और नाराज़गी की भेंट ना चढ़ाएं।
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अच्छी ज़िंदगी के लिए सिर्फ प्रेम नहीं, बल्कि सब्र, खामोशी, यकीन और हौसला भी चाहिए।
बिल्कुल वैसे ही जैसे....
एक टेस्टी डिश के लिए नमक के साथ बहुत सारे मसालों की ज़रूरत भी पड़ती है।
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कुछ चीज़े कितना जल्दी बन जाती हैं,
जैसे...
नाश्ते में आमलेट ब्रेड
लेकिन...
कुछ चीज़े बहुत धीरे बनती हैं
जैसे...
ज़िन्दगी💐
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जितना ज़्यादा आप सामने वाले से उम्मीद बांधेंगे,
उतनी ज़्यादा आप को तकलीफ होगी।
क्योंकि सामने वाला कभी भी
आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरेगा।
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अगर लोग आप में कमियां निकाल रहे हैं...
तो परेशान मत हों,
बहुत जल्द आपमें सिर्फ खूबियां ही बचेंगी।
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पैसा ही सब कुछ देता है,
पैसा ही सब कुछ लेता है
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पैसा, पैसा, पैसा....
झगड़ा, झगड़ा, झगड़ा....
यही तो होता है...
पैसा हो तो झगड़ा,
पैसा ना हो तो झगड़ा।
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आप की नींद आपके सपनों से बड़ी नहीं होनी चाहिए।
और...
आपके शौक आपकी कमाई से ज़्यादा नहीं होने चाहिए।
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ठीक हूं...
यह तो हम हर किसी से कह देते हैं।
लेकिन!
परेशान हूं मैं...यह सुनने वाला क
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सोच शायद इसी को कहते हैं....
एक शख्स अपनी गाड़ी धो रहा था।
बहुत खूबसूरत कार है! पड़ोसी ने कहा।
मेरे भाई ने दी है। वह मुस्कुराए।
काश! मेरा भी कोई ऐसा भाई होता।
पड़ोसी अफसोस करते हैं।
काश! वह भाई मैं होती।
पास में खड़ी पड़ोसी की पत्नी कहती है।
यही फर्क है सोच का...
कोई पाने की सोचता है कोई देने की।
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इस की क्या ज़रूरत थी....
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अभी से थक गये। अभी तो तुम्हें हंसना है।
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कूलर का पानी जाता कहां है और ए सी का पानी आया कहां से है।
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ज़िंदगी खूबसूरत है। अगर रिश्तों में मिठास हो।
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मुस्कुराता चेहरा, चमकती आंखें,मीठी ज़ुबान, हाथों में हुनर, बातों में समझ, होंठों पे खनख,और फूली हुई गर्मा गर्म पूरी किसे पसन्द नहीं आती। अब मुस्कुरा भी दें। लोगों को फूली हुई पूरी पसंद है। समझे❤️♥️
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मिर्च का जलवा,
लहसुन की अदाएं,
टमाटर की लाली...
ऐसी ही तो ज़िंदगी है,
कभी तीखी, कभी मीठी,
और....
हर लम्हों में छुपी अपनी अलग कहानी!
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सबसे मुश्किल काम....
सामने वाले को अपनी बात समझाना।
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नज़रों को समझो, लफ्ज़ो का क्या है.....
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कुछ चीज़े हमेशा याद रहती हैं...
जैसे....
कोई डिनर, कोई लंच, किसी का साथ और खाने का स्वाद।
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Kya Aap Ki Reel Viral Nahi Ho rahi?
मेरी भी नहीं हो रही...
इसी बात पर मुस्कुराएं....
और लग जाएं काम पर, क्योंकि कब कौन Viral हो जाए कौन जानता है!
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अपनों को छोड़ कर कौन सुकून से रहा है भला....
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मैं सही, मैं सही...
तो फिर गलत कौन?
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बनाने वाले ने भी क्या खूब बनाया है
रिश्ता यह दोस्ती का मुहब्बत से भरा है
चाहें हर एक रिश्ते में सब दोस्ती का रिश्ता
देता सुकून हमको यह दोस्ती का रिश्ता
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ख्वाहिश है जग जीत लूं, और अपनों को हार बैठे हैं।
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नया समंदर तो तलाश कर लोगे, मगर रहेगा तो उसमें भी पानी ही।
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सब ने किया बुरा, यही सोच रहा हरदम।
और फिर अंत में हम भी बुरा कर गये।
बस यही हम बुरा कर गये।
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और फिर शाम हो गई.....
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यह सच है कि ज़िंदगी प्यार के बिना नहीं गुज़रती....
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वह जो कहते हैं ज़िंदगी में प्यार ज़रुरी है, तो उन से कह दो...
प्यार से पहले विश्वास ज़रूरी है।
क्योंकि प्यार अगर सांस है तो विश्वास आक्सीजन...
और अगर आक्सीजन ही ना हो तो फिर....
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मसालों से नहीं, प्यार से पकाया खाना ही असली लज़ीज़ होता है।
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ज़ायका मसालों का मोहताज नहीं, जब दिल से बनाया जाए तो हर निवाला खास होता है।
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खाने का असली स्वाद मसालों में नहीं, उसे बनाने वाले के प्यार में होता है।
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ज़िंदगी सबक देती है। इम्तेहान के बाद....
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वक्त-वक्त की बात है!
एक ज़माना था.....
पहले सबक मिलता था
फिर इम्तिहान देते थे।
आज ज़माना है.....
पहले इम्तिहान देते हैं!
फिर सबक मिलता है।
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जब मुहब्बत से पकाया जाए, तो हर लुक़मा लाजवाब बन जाता है।
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स्वाद सिर्फ़ मसालों का नहीं, दिल के जज़्बातों का भी
होता है।
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अगर सुकून दौलत में होता....
तो झोपड़ी में हंसी ना गूंजती।
और
अगर
स्वाद मसालों में होता....
तो
मां के हाथों का खाना कभी याद ना आता।
तो हाथों की ज़ायका मशहूर ना होता।
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स्वाद अगर मसालों में होता... तो प्यार से परोसी थाली इतनी याद ना आती।
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स्वाद अगर मसालों में होता... तो गरीब की रोटी कभी स्वादिष्ट न होती।
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मां ही तो है जो....
औलाद जब गलती करता है तो मां को शक बेटे पर नहीं बल्कि अपनी तरबियत पर होता है।
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अगर नींद मखमली बिस्तर पर होती....
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कभी मसालों से हट कर भी सोचें, मुहब्बत से बनाया गया खाना भी बहुत लज़ीज़ होता है।
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मुहब्बत क्या ढूंढ रहे हो साहेब?
पहले नज़र से नफरत का चश्मा तो उतारो।
-Little_Star
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झगड़ने के लिए तो सारी ज़िन्दगी पड़ी है.....
क्यों ना आज किसी रूठे को मना लें हम।
-Little_Star
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कभी सब्र, कभी प्यार तो कभी खामोशी....
वक्त देना पड़ता है रिश्तों को साहेब!
-Little_Star
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होना या ना होना यही सवाल है.....
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सोचों का सिलसिला कभी रूका भी है......
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बात बहुत गहरी है बहुत समझ कर पढ़ना....
पैरेंट्स को अपने बच्चों को मोबाइल देखते
देख कर उसी तरह बुरा लगता है...
जिस तरह जवान बच्चों को
अपने बूढ़े पैरेंट्स को मोबाइल देखते
देख कर बुरा लगता है।
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हां हैलो कौन?
अच्छा सुनीता, अरे बगल में ही रहती हो फिर फोन क्या? घर पर ही आ जाती।
अच्छा आज जब बारिश हो रही थी तो रितु की बहू बारिश में नहा रही थी तो बुरा हो गया । और जो साथ में वहीं पर रितु की बेटी नहा रहा थी। तो उसका क्या।
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हमारी सबसे बड़ी गलती.....
सामने वाले को छोटा समझना।
-Little_Star
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मैं सही..... तो फिर गलत कौन?
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शादी बन गई एक तमाशा,
मिलन की अब वह तड़प कहां।
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कुछ करूंगा तो ज़रूर.....
मगर क्या?
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एक ख्वाब कुछ ऐसा....
मैं, मेरा काम और मेरा पैसा।
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ख्वाब नहीं देखा तो क्या देखा।
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हर दूसरे आदमी का पहला सवाल क्या मैं कामयाब हो पाऊंगा
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नारी को नारी का प्रोत्साहन....
कपड़े, बर्तन,खाने और सफाई के बाद भी हम बहुत कुछ कर लेते हैं। वरना लोग....
अब क्या कहें रहने दें.....
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सहने वाले का सोचें ज़रा....
आप तो कह कर निकल गये।
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फिक्र न करें, सब ठीक हो जायेगा।
बहुत कीमती अल्फाज़ हैं, कभी कह कर तो देखें।
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आपकी रोटी फूली हुई और मुलायम हो सकती है। अगर आप को रोटी बनाने का हुनर हो।
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चिकन को लज़ीज़ बनाने के लिए खास मसालों की ज़रूरत नहीं पड़ती। अगर आप दिल से बना रहे हैं तो....
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एक औरत तब तक बेचारी है। जब तक वह बहू है।
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मुहब्बत को छोड़ कर लोग मुहब्बत तलाशते हैं।
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तन्हाई में वक्त गुज़रता नहीं, और साथ हो तो वक्त ठहरता नहीं है।
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समझने वाली बात है...
जो शुरू से बुरा था वह तो बुरा था ही। लेकिन जो शुरू में अच्छा था बाद में बुरा हो गया, वह तो उससे भी बुरा।
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बहू से कहीं ज़्यादा मुश्किल है सास बनना।
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सब्र सब्र सब्र....
हर रिश्ते में यही ज़रूरी, वरना फिर तू-तू मैं-मैं।
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खामोशी के अल्फाज़ भाषाओं के अल्फाज़ से कहीं आसान हैं। समझ सको तो समझ लो।
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खुशियों का ताल्लुक दिन से बल्कि दिल से होता है। क्योंकि जिस Sunday कपड़े और बर्तन नहीं धोते। उस Sunday हम खुश रहते हैं। और जो Sunday यह सब काम करने में बीत जाता है। उस Sunday.....
-Little_Star
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समझो तो ज़िंदगी एक खूबसूरत ख्वाब है,
जिसे हम रोज़ हकीकत का रूम देते हैं।
और ना समझो तो एक डरावना ख्वाब जिस से हम रोज़ पीछा छुड़ाना चाहते हैं।
-Little_Star
ऐ चांद तू संदेशा लाया है ईद कल मगर
पिछले बरस की ईद मगर लाजवाब थी।
-Little_Star
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हम जो बोयेंगे वही काटेंगे, अब यह हमारे ऊपर है कि हम क्या बोयें।
-Little_Star
हम मिडिल क्लास वाले भी बड़े अजीब होते हैं
हंसते-हंसते रोते हैं और रोते हुए हंस देते हैं हम
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कभी मां जीत जाती है कभी जाती है बीवी जीत। मुहब्बत की है यह जंग यारों, मुहब्बत हार जाती है।
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कभी सुनता है वह मां की, कभी सुनता है बीवी की। मुहब्बत की यह जंग यारों मुहब्बत हार जाती है।
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ना जानें क्यों....
जो आनंद पति के पैसों में में होता है। वह आनंद बेटे के पैसे में नहीं।
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ना जाने क्यों.…..
मां की बेटी अच्छी, और सास की बहू खराब।
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Ac वालों का दर्द कौन समझे।
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करोड़ों Like👍 बचा लेते हैं। लाखों लोग....
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मुहब्बत के लिए दिमाग की नहीं दिल की ज़रूरत होती है।
मिस्टर समझदार...
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रूलाती तो प्याज भी है।
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कुछ बातें समझने के लिए लगता है ज़िंदगी कम है। और कुछ बातें लम्हों में समझ आ जाती हैं।
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उसने दोपहर में खाना नहीं बनाया।
क्योंकि सुबह उन सब ने नाश्ता देर से किया था।
लेकिन शाम को उसे अफसोस हुआ
मुझे मां को खाना देना चाहिए था।
इसे कहते हैं पछतावा
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ज़िंदगी के सफर में आगे बढ़ते हुए
समझ आया
कि
मां का वह डांटना
और
पिता का वह प्यार
तो कभी नम्बर कम आने पर
पिता का वह गुस्से से देखना
और फिर मां का वह तसल्ली वाला अंदाज़
ऐसी बहुत सारी बातें
और
फिर
हमारी वह कामयाबी
शायद
ज़िन्दगी के यही खट्टे मीठे पल
हमें संवारते हैं।
मज़बूत बनाते हैं
हमें शिखर तक पहुंचाते हैं।
बिल्कुल वैसे ही
जैसे
नींबू
हरी मिर्च
प्याज़
टमाटर
और
सरसों तेल
झाल मुड़ी को स्वादिष्ट बताती हैं।
झाल मुड़ी का वह स्वाद सिर्फ नमक से नहीं आता।
बल्कि
नींबू की खटास
और
सरसों तेल की वह झार
जो तेज़ तो लगती है
मगर खाने के बाद
मुंह का स्वाद बना देती है।
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किसी को जान कह देना बहुत आसान है लेकिन मगर उस जान की कदर करना बहुत मुश्किल.....
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सुबह उठते ही…
नाश्ते में क्या बनेगा?
नाश्ता करते हुए…
लंच क्या बनेगा?
लंच करते हुए…
चाय के साथ क्या स्नैक्स रहेगा?
चाय पीते हुए…
डिनर में क्या बनेगा?
डिनर करते हुए...
अब कल क्या बनेगा?
अगर ऐसा आप के साथ होता है…
तो!
कोई फिक्र वाली बात नहीं है।
क्योंकि…
आप अपने परिवार के एक ज़िम्मेदार नागरिक हैं।
और…
इतनी ज़िम्मेदारी वाली ज़िम्मेदारी हर किसी को नहीं मिलती।
अब मुस्कुरा भी दें....

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