धड़कन | भाग 44 | Dhadkan Part 44 | Heart Touching Hindi Love Story
श्लोका के ऐसा करते ही शिवाय बेसाख्ता रोने लगते हैं। लेकिन श्लोका खामोश रहती है। वह चाहती थी आज शिवाय के दुख दूर हो जायें। बरसों से उस के दिल में जो दर्द हैं वह आंसूओं के रूप में बाहर आ जायें।
शिवाय अपना सर श्लोका के गोद में रख लेते हैं। श्लोका कुछ सोच कर उठते लगती है।
कहां जा रही हो? यहीं पर रहो थोड़ी देर प्लीज़। शिवाय की आवाज़ के साथ आंखों में भी रिक्वेस्ट थी।
श्लोका ड्रेसिंग टेबल से हेयर आयल लेकर आती है और शिवाय के बालों में लगाकर मालिश करने लगती है। श्लोका तुम ने बताया नहीं मैंने जो किया गलत किया? मैं अब तब खामोश था। कभी कोई शिकवा नहीं किया। कभी भी किसी पर गुस्सा नहीं हुआ। लेकिन अब मैं आगे की ज़िंदगी सुकून से जीना चाहता हूं। इस लिए मैंने आज सख्त फैसला ले लिया।
शिवाय के एक-एक लफ्ज़ में दुख छिपा हुआ था। और श्लोका सोच रही थी कौन है वह खुशनसीब जिस के लिए शिवाय अपने परिवार से लड़ पड़े? लेकिन शिवाय से पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। लेकिन आज शिवाय की बातों के बाद उसे डर लगने लगा था कि कहीं वह शिवाय को खो ना दे। शिवाय ने आज तक उस से अपनी मुहब्बत का इज़हार नहीं किया है। और ना ही कोई ऐसी बात कही है जिससे लगे कि शिवाय उस से शादी करेंगे।
क्या सोच रही हो? शिवाय ने आंख खोल कर उसकी तरफ देखा। क्योंकि जिस तरह वह उसके बालों में उंगलियां चला रही थी उससे शिवाय को लग गया कि उस का दिमाग कहीं और चल रहा है। वह मन से कहीं और है।
कुछ नहीं, और अब आप सोने की कोशिश करें। आप को नींद आ जायेगी तो आराम मिल जायेगा। कल हम को निकलना भी है। श्लोका ने अपना सारा ध्यान शिवाय के सर की मालिश में लगा दिया। ताकि शिवाय को नींद आ जाए।
थोड़ी देर में जब शिवाय सो गये तब श्लोका अपने रूम में चली गई।
रूम में जाकर वह कुछ भी सोचने के बजाय सिर्फ सोना चाहती थी। मगर नींद उसकी आंखों से कोसो दूर थी।
उनकी पैकिंग हो ही चुकी थी। उन्हें सिंगापुर के लिए निकलना था।
शिवाय नाश्ता करने नीचे गये तो सुधीर जी ने बहुत गौर से शिवाय को देखा। शिवाय के बालों में तेल चमक रहा था। और उस के चेहरे पर इस वक्त सुकून था। सुधीर जी समझ गये कि सुमन शिवाय के दुख में उस के साथ थी।
दोनों ने खामोशी से नाश्ता किया।
नाश्ता करते ही शिवाय वापस रूम में चले गये।
श्लोका अपना नाश्ता रुम में लेकर चली गई थी। दो घंटे बाद उन्हें निकलना था।
श्लोका तैयार हो कर नीचे चली गई। कमला उन दोनों का सामान लेकर पहले ही नीचे चली गई थी।
हर कोई वहीं पर था। श्लोका सब से मिलने लगी।
आंटी शिवाय जितने भी बुरी हैं लेकिन प्लीज़ आज आप एक बार उन्हे गले लगा लेना। श्लोका ममता जी से हाथ मिला कर कहती है।
उसी वक्त शिवाय ऊपर से आते हैं और सब से मिल कर बाहर जाने लगते हैं।
मुझ से नहीं मिलोगे शिवाय? ममता जी शिवाय को देख कर कहती हैं।
आज से पहले मैं बहुत बार बाहर गया हूं लेकिन आप तो कभी नहीं मिलीं फिर आज? शिवाय हैरान हुए। लेकिन ममता जी कुछ कहने के बजाय उसे गले से लगा लेती हैं। उन के ऐसा करते ही शिवाय के अंदर जैसे कुछ टूट जाता है। बेसाख्ता बहुत सारा पानी उसकी आंखों में आ जाता है। उस के सामने का हर मंज़र धुंधला जाता है। मां की आगोश के लिए हमेशा वह तरसता रहा। और आज जब मां ने उसे गले लगाया तो उसे समझ नहीं आया कि वह क्या करें।
शिवाय ममता जी से अलग होकर सीधा जाकर गाड़ी में बैठ गये। श्लोका पहले ही बैठ चुकी थी। शिवाय के बैठते ही ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट कर दी।
श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा। शिवाय आंख बन्द किये पीछे सिर रखें हुए थे। श्लोका ने शिवाय के हाथ पर अपना हाथ रख दिया।
जारी है...
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