रूबरू | Part 15 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

मायरा तुम कौन हो? और क्यों आई हो? सच सामने आने तक... मैं तुम्हें सुकून से सांस लेने नहीं दूंगा। तुम्हारा हर कदम मेरी निगाहों में होगा।

...

मायरा के यहां आने का सिर्फ एक ही मकसद था... और वह मकसद था बॉस से मिलना। लेकिन अपने मकसद में वह कामयाब नही हो पा रही थी। 

मारिया ने कहा था कि बॉस विदेश गए है। लेकिन इतना वक्त?

 क्या वह सच में बाहर हैं... या कुछ छुपाया जा रहा है?

वह कहां है? कब वापस आयेंगे? 

उसे यह जानना बहुत ज़रूरी था। क्योंकि बहुत दिनों तक इस तरह वह यहां नहीं रह सकती थी।

उसे अपनी जॉब ज्वाइन करना था। इस तरह केयरटेकर की जॉब करके वह मिस्टर बॉस का इंतेज़ार नहीं कर सकती।

उसे वापस जाना है।

एक रास्ता... जो उसके इंतेज़ार में पलकें बिछाए हुए है।

एक मंज़िल जो उसका सपना था। 

उसे अपने सपनों की ओर आगे बढ़ना था। लेकिन वह सीधे और खूबसूरत रास्ते को छोड़कर मुश्किल और उलझे हुए रास्ते पर आ गई थी।

मुझे जल्द ही उस रास्ते पर वापस मुड़ना होगा। जहां मेरी मंज़िल है।

मुझे जल्दी फैसला लेना होगा...वरना बहुत देर हो जायेगी।

सोचों का सिलसिला जारी था...अपनी सोचों में वह खुद ही उलझ गई थी। 

और जब उसे कुछ समझ नहीं आया तो अपने सवालों का जवाब जानने के लिए किचन में पहुंच गई। क्योंकि वह समझ गई थी कि इस घर के राज़ यहां पर काम कर रहे स्टाफ ही बता पायेंगे।

फ्रीज़ से पानी निकालकर वह धीरे-धीरे पीती है। लेकिन नज़रें वहां पर काम कर रही रहीमन पर टिकी थी।

तुम हर काम बहुत ज़िम्मेदारी से करती हो...अगले ही पल वह रहीमन के पास खड़ी थी।

जी, रहीमन बहुत शांत दिखी।

उसका छोटा सा "जी" उसे आगे बात करने का रास्ता नहीं दिखा पाया। लेकिन उसे तो बहुत कुछ जानना था।

तुम रहती कहां हो? मायरा वहीं पर रखी प्लेट से गाजर उठा कर मुंह में रखती है। 

बाहर हम सबका कमरा है। रात में हम उधर चले जाते हैं। 

दानिश सर विदेश ज़्यादा रहते हैं क्या? वह मुद्दे पर आ गई।

सलाद काटते हुए रहिमन के हाथ उसकी बात पर रूक गए।

अपने काम के इलावा हमें कोई और बात करने की इजाज़त नहीं है।

रहीमन बात खत्म करती है। 

एक पल के लिए उनके चेहरे पर आया डर मायरा से छुप नहीं सका। लेकिन दूसरे ही पल रहीमन बिल्कुल नार्मल थी।

मैं तुम्हारा इम्तिहान ले रही थी। गुड... तुम पास हो गई। वाकई में तुम ब्लैक हाउस के लिए वफादार हो। कहते ही मायरा किचन से बाहर निकल गई।

और अंदर खड़ी रहीमन शुक्र का सांस लेती है कि अगर वह उसकी बात का जवाब दे देती तो अब तक अपनी नौकरी से हाथ धो चुकी होती।

अगर मैं मैदान में उतरी हूं तो कुछ हथियार साथ भी होंगे। धीमी मुस्कान के साथ वह अपने कमरे की ओर बढ़ गई। क्योंकि दादी ने कहा था कि दो घंटे से पहले वह उसके रूम में ना आए।

कमरे में जाकर वह फोन उठा लेती है। वैसे तो उसकी नज़र फोन पर थी लेकिन उसका मन ब्लैक हाउस की ऊंची दीवारों के अंदर उलझा हुआ था।

इतना बड़ा घर है...

मगर सिर्फ दो लोग?

बाकी लोग कहां हैं?

मिस्टर बॉस के मां-बाप कहां हैं?

ना ही कोई रिश्तेदार,न कोई मिलने वाला।

यहां रहते इतने दिन हो गए मुझे। न यह लोग कहीं जाते हैं न ही कोई आता है।

ऐसा कैसे हो सकता है कि यहां पर इनका कोई रिश्तेदार ही ना हो...

मैं कब तक ऐसे ही मिस्टर दानिश का इंतेज़ार करती रहूंगी।

मुझे अब जल्द ही कुछ करना पड़ेगा।

इस वक्त कुछ काम नहीं है। चलो जब तक कुछ और पता करने की कोशिश करती हूं। यही सोचते हुए वह उठ कर बाहर निकल गई।

बाहर निकलते हुए उसका इरादा कुछ और स्टाफ से बात करने का था। लेकिन ड्राइंग रूम के पास से गुज़रते हुए उसके कदम रूक गए।

अंदर से ताबिश की आवाज़ के साथ कुछ और भी आवाज़े आ रही थीं। वह वहीं रूक कर उनकी बातें सुनने लगी। 

वह लोग हीरों के बारे में बातें कर रहे थे। 

हीरों की बातें हों और मायरा का दिल न मचले, ऐसा तो हो नहीं सकता। वह चुपचाप खड़ी सुनती रही।

जैसे ही उनके जाने की बात हुई। वह वहां से हट गई। लेकिन ऐसे की वहां का सब वह देख ले। लेकिन उसे कोई ना देख पाए।

यह सामान मेरे रूम में रख दो। मैं बाहर जा रहा हूं। आने में देर हो सकती है।

ताबिश दरवाज़े के पास आकर एक स्टाफ को कुछ बॉक्स और फाइल देता है।

ठीक है सर...कहते ही स्टाफ आगे बढ़ गया। और ताबिश बाहर की ओर बढ़ गया।

मायरा भी अपने रूम में जाने के इरादे से वहां से हट गई। लेकिन उसके मन में उन हीरों की बातें चल रही थी। जो आए हुए लोग ताबिश को बता रहे थे।

अभी तो ताबिश आने से रहे...क्यों न उनके कमरे में जाकर एक बार उन हीरों को देख लूं।

नहीं...अगर पकड़ी गई तो?

लेकिन कैसे पकड़ी जाऊंगी? ताबिश को आने में देर होगी। यह बात उन्होंने खुद कही है।

और फिर अगले ही पल वह ताबिश के रूम में थी।

...

ताबिश की नज़र अपने मोबाइल स्क्रीन पर जमी हुई थी।वह उसकी एक-एक हरकतों को बहुत गौर से देख रहा था।

इसका मतलब तुम यहां पर हीरों के लिए आई हो। ताबिश के मन में ख्याल आया।

मायरा एक बार हीरों को देखती, फिर फाइल उठाकर उसको पढ़ती।

उसे यकीन नहीं हो रहा था कि मायरा इस तरह उसके रूम में जा सकती है। 

लेकिन उसकी हैरानी उस वक्त और बढ़ गई जब मायरा सब देखकर कमरे से बाहर निकल गई।

जब वह ड्राइंग रूम में क्लाइंट के साथ डील कर रहा था। उस वक्त उसके गार्ड का मैसेज आया था कि मिस मायरा दरवाज़े पर आपकी बातें सुन रही हैं।

उस वक्त तो उसने गार्ड को कुछ भी कारवाई करने से मना दिया‌ था। लेकिन उसे यह जानना था कि मायरा उसकी बातें क्यों सुन रही थी। इसलिए उसने दरवाज़े पर जाकर स्टाफ को बॉक्स दिए थे। 

वह जानना चाहता था कि उसकी बात सुनने का मायरा का मससद क्या है?

लेकिन हीरों को सिर्फ देखकर मायरा का कमरे से बाहर निकल जाना। उसके लिए एक और सवाल पैदा कर गया।

उसे अपने कमरे में देखकर उसे लगा था कि वह इन हीरों के चुराने के मकसद से गई है। 

लेकिन वह उसे गलत साबित कर गई।

कमरे में जाकर मायरा देर तक उन हीरों के बारे में लिखती रही। 

सब नोट करने के बाद उठी तो नमाज़ का वक्त हो रहा था।

नमाज़ पढ़कर तब दादी के पास जाती हूं...यही सोचकर वह बाथरूम चली चली गई। वुज़ू करके आते ही वह नमाज़ के लिए खड़ी हो गई।

जैसे ही वह नमाज़ के लिए खड़ी हुई दरवाज़ा नॉक होने लगा। बाहर जो भी था बहुत ही बेसब्र था। क्योंकि नॉक की आवाज़ तेज़ से तेज़ होती जा रही थी।

नमाज़ पूरी होते ही वह गुस्से से दरवाज़ा खोलती है। 

सामने ताबिश खड़ा था।

तुम्हारा रूम लॉक क्यों था? ताबिश गुस्से में अंदर दाखिल हुआ।

नमाज़ पढ़ रही थी। वह अपने गुस्से को दबा गई।

नमाज़ पढ़ते वक्त रूम बंद करने की वजह?

मैं चेंज कर रही थी। इसलिए भूल गई। और वैसे ही नमाज़ पढ़ने लगी। वह बेड पर फैले कपड़ों को साइड करती है।

चेंज करने के लिए चेंजिंग रूम है। वह चेंजिंग रूम की ओर इशारा करता है।

आप बताएं... कुछ काम था? वह बात बदल गई।

क्यों बिना काम के नहीं आ सकता? उसकी नज़र मायरा के चेहरे पर ठहर गई। नमाज़ स्टाइल में दुपट्टा बांधे वह उसे बहुत खूबसूरत और नेक लगी।

बिल्कुल आ सकते हैं यह घर आपका है... और आपको पूरा हक है कि आप कहीं भी, कभी भी आ जा सकते हैं। वह उसकी कही बात दोहराती है।

अच्छी बात है कि तुमको मेरी कही हुई बात याद है। वैसे तुम्हारी नमाज़ हो गई? ताबिश सोफे पर आराम से बैठ गया।

अभी बाकी है। ताबिश को बैठते देख उसे उलझन हुई।

ठीक है तुम नमाज़ पूरी कर लो। फिर बात करते हैं। कहते ही वह फोन देखने लगा।

मायरा एक नज़र उसे देखती है और नमाज़ के लिए खड़ी हो जाती है।

नमाज़ के बाद दुआ के लिए उठे उसके हाथ ताबिश का ध्यान अपने ओर खींच लेते हैं।

ताबिश उसके दाए तरफ बैठा था। उसके दिल को कुछ हुआ। वह फोन से नज़र हटाकर उसे देखने लगा।

दुआ मांग कर मायरा उठी। जायनमाज़ रखकर ताबिश की ओर देखती है। वह उसे ही देख रहा था।

बताएं क्या काम था? वह उसके बिल्कुल सामने खड़ी हुई।

उसकी निडरता ताबिश को गुस्सा दिला रही थी। लेकिन उसकी सादगी उसे अपनी ओर खींच रही थी।

ताबिश की आंखें उसी पर टिकी हुई थीं।

मायरा को उसकी नज़रें बेचैन कर रहीं थीं, लेकिन उसने अपने चेहरे पर कोई असर नहीं आने दिया‌।

आपको शायद कोई काम था... 

मायरा के भाव बदले।

न पीछे हटी...न उसकी नज़रों से बची।

ताबिश सोफे से उठा... और धीरे-धीरे उसके करीब आया...

हर कदम के साथ कमरे की खामोशी और गहरी होती जा रही थी।

कमरे में एक अजीब से सन्नाटा फैल गया।

जारी है...

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