डोर धड़कन से बंधी | भाग 101 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 101 | Hindi Romantic Story
खुशियां ओबेरॉय मेंशन में दस्तक दे रही थीं। दुख और परेशानी के बादल छंट रहे थे। चेहरों पर खुशी और दिल में सुकून था। मुहब्बत की डोर धड़कन से बंध रही थी।
...
नताशा चाय बहुत अच्छी बनी है। सुधीर जी चाय की चुस्की लेकर खुशी से कहते हैं।
थैंक्स दादू... नताशा मुस्कुरा कर कहती है। और श्लोका के पास जाकर बैठ जाती है।
ओबेरॉय परिवार डिनर के बाद साथ बैठा हुआ था। सुधीर जी ने चाय के लिए कहा तो नताशा ने कहा कि वह बना देगी।
शुक्र है सब अच्छे से हो गया। ममता जी खुशी से कहती हैं।
जी मौम, रिसेप्शन भी अच्छे से हो गया और नताशा की मां भी गांव जाकर खुश हैं। उनको वहां पर स्कूल का प्रिंसिपल बना दिया गया है। साथ ही वहां पर उनको "अपना घर" का भी हेड बना दिया गया है।
यह तो बहुत अच्छी बात है उससे उन का मन भी बहला रहेगा। ममता जी खुशी से कहती हैं।
आप ने हमारे लिए बहुत कुछ किया है। खास कर मम्मी को वहां पर खुश देखकर बहुत खुशी हुई। नताशा खुशी से शिवाय को देख कर कहती है। वह और प्रेम खुद उनको गांव छोड़ कर आए थे।
आज के बाद यह बात मत करना... जो है सब हमारा है। हम ने किसी पर कोई ऐहसान नहीं किया है। शिवाय नाराज़गी से कहते हैं।
ठीक है डैड अब नहीं कहूंगी। नताशा कान को हाथ लगाती है।
गुड... यह बताओ आफिस कब से ज्वाइन करोगी? शिवाय मुस्कुरा कर नताशा से पूछते हैं।
जब आप कहें डैड...
ठीक है, फिर कल सुबह तैयार रहना।
ठीक है...
चलो अब सब लोग आराम करो। ममता जी उठ खड़ी हुई।
तुम चलो मैं आता हूं। श्लोका इधर आओ मेरे पास। सुधीर जी श्लोका को अपने पास बुलाते हैं।
श्लोका उठ कर सुधीर जी के पास बैठ जाती है।
शिवाय भी उठ कर सुधीर जी के पास जाते हैं। मैं जाऊं ना डैड? क्योंकि मुझे पता है इस वक्त आपको अपनी बेटी से बात करनी है। शिवाय प्यार से श्लोका को देखते हैं।
बिल्कुल सही समझे तुम... सुधीर जी ज़ोर से हंसते हैं।
दादू तब हम लोग भी जा रहे हैं... प्रेम भी उठ खड़ा होता है।
हां ठीक है सब लोग अब जाओ।
खुश हो?... सब के जाते ही सुधीर जी श्लोका से पूछते हैं।
जी डैड, किसी तरह ज़िन्दगी की गाड़ी लाइन पर आई है। वरना कभी-कभी मुझे डर लगने लगता था कि सब ठीक भी होगा या नहीं। श्लोका के मन में गुज़री हुई बातें आ गईं।
तुम सही कह रही हो। लेकिन सारी परेशानियां तुम दोनों की समझदारी से दूर हो गईं। तुम दोनों मेरा मान हो।
मेरे दोस्त ने तुमको बहुत अच्छे संस्कार दिए थे। और मुझे खुशी है मैंने तुम को चुना। और फिर मेरे शिवाय ने। सुधीर जी कहते हुए दूर बहुत दूर निकल गए।
जाओ अब आराम करो। थक गई होगी। सुधीर जी उसके सर पर हाथ रखकर कहते हैं।
आप का आशिर्वाद हमेशा हमारे साथ रहे। श्लोका झुक कर उन का आशिर्वाद लेती है। और उन का हाथ थाम कर खड़ी होती है। उनको कमरे तक छोड़ कर वह ऊपर चली जाती है।
...
अब यह आफिस तुम को सम्भालना है। प्रेम तो इंटीरियर देखता है। शिवाय आफिस में नताशा को अपनी चेयर पर बैठने का इशारा करते हैं।
मैं यहां पर कभी नहीं बैठ सकती डैड। मैं आप के कदमों की धूल भी नहीं। नताशा पीछे हटते हुए कहती है।
तो क्या तुम आफिस में काम नहीं करोगी? शिवाय हैरान हुए।
मैं काम करूंगी। लेकिन आपकी चेयर पर नहीं बैठूंगी।
ठीक है जब मैं रहूंगा तब मत बैठना। लेकिन मेरे ना रहने पर बैठ जाना। शिवाय ने रास्ता निकाला।
नहीं डैड, ऐसा ना कहें। नताशा साफ मना करती है।
ठीक है फिर यहां पर नताशा मैडम का सेटअप तैयार कर दें। शिवाय मैनेजर को इशारा करते हैं।
क्योंकि वह चाहते थे कि नताशा जल्द से जल्द सब सीख जाए। ताकि उन को सुकून हो जाए कि अपने परिवार का सदस्य आफिस संभाल रहा है।
उसी वक्त दरवाज़े पर नॉक होता है। और आदर्श अंदर आता है।
क्या बात है बहू रानी को आफिस की ज़िम्मेदारी दी जा रही है।
आदर्श मुस्कुरा कर कहते हैं।
हां, कुछ ऐसा ही समझ लो। नताशा एक बार सब समझ ले तो मैं भी निश्चित हो जाऊं।
यह सब संभाल लेगी... आखिर शिवाय सिंह ओबेरॉय की बहू जो है।
आप लोगों का आशिर्वाद साथ रहे। नताशा शर्मा जाती है।
जाओ आज तुम्हारी छुट्टी है। ड्राइवर के साथ प्रेम के आफिस चली जाओ। और उसे सरप्राइज़ दो। शिवाय हंसते हुए कहते हैं।
ठीक है डैड, नताशा शर्मा कर बाहर निकल जाती है।
शिवाय आदर्श की ओर हाथ बढ़ाते हैं... आदर्श के हाथ थामते ही शिवाय उठ खड़े होते हैं। और दोनों सोफे पर जाकर बैठ जाते हैं।
ऐसे क्या देख रहे हो?...
आदर्श को अपनी तरफ देखता पाकर शिवाय मुस्कुरा कर पूछते हैं।
फाइनली तुम यह जंग भी जीत गए। आदर्श गर्व से कहता है।
श्लोका के साथ रहते हर जंग आसान हो गई।
वाकई तुम दोनों की मुहब्बत एक अनोखी मुहब्बत है। वरना मुहब्बत तो बहुतों ने की है। लेकिन तुम्हारी मुहब्बत...
तुम सही कह रहे हो... मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे कभी किसी से ऐसी मुहब्बत होगी लेकिन जब हुई तो ऐसा लगा जैसे वह मेरी ज़िन्दगी बन गई। मेरे हर सांस में वह थी। शिवाय की आंखों में श्लोका का अकस था।
मैंने देखी है तुम्हारी तड़प...मेरे अंदर तुम्हारा हर वह दर्द छिपा हुआ है जो तुम ने सहा है। कभी-कभी मैं सोचता था कि जब मुझे तुम्हारा दुख देख कर इतनी तकलीफ रही है तो फिर तुम किस तकलीफ में होगे।
यह सच है दिल पर बहुत वार हुए, मुश्किलें भी कम नहीं रहीं... लेकिन शुक्र है आखिरकार सब ठीक हो गया।
शिवाय की आंखों में हर उस दर्द और मुश्किलों की परछाईं थी जिसे सह कर आज वह सुकून से बैठे हुए थे।
और तुम बताओ... सब ठीक है ना? शिवाय आदर्श की ओर देखते हैं।
हां सब ठीक है... एक उमर के बाद इंसान की सबसे बड़ी दौलत उसकी औलाद होती है। आज हम उसी दौर में हैं, और मुझे खुशी है कि मेरे बच्चे मेरे साथ हैं।
और अब तो मैं दादा बनने वाला हूं, और तुम नाना... हमारे हिस्से में एक और ओहदा आने वाला है। आदर्श के चेहरे पर खुशी थी।
एक वक्त था कि हमारे बच्चे हमारी तरफ देख कर जीते थे। अब वक्त बदल रहा है। आज बच्चों की ज़िन्दगी है, उनकी सोच है। हमें उनकी सोच उनकी इशारे भी समझने होंगे। तभी हम खुश रहेंगे।
तुम सही कह रहे हो। लेकिन हमें खुश होना चाहिए कि हमारे बच्चे हमें समझते हैं। मेरे आरव और पूजा मेरा मान हैं। मैं चाहे जितना भी बूढ़ा हो जाऊं, वह कभी भी मुझे बोझ नहीं समझेंगे। आदर्श गर्व से कहते हैं।
मैंने नताशा को भी इसी लिए चुना था क्योंकि बहू एक दिन के लिए हमारे घर नहीं आती कि हम जो जैसी भी है सह लें। वह हमारे घर का एक नया अध्याय लिखती है। वह हमारे घर, हमारे वंश, हमारे परंपरा को आगे ले जाती है। और मैं चाहता था कि मेरे घर की बागडोर एक ऐसी लड़की के हाथों में हो जिसे रिश्तों की समझ हो। और मुझे खुशी है कि रिश्तों के मामले में हम बहुत खुशनसीब हैं।
और इस खुशनसीबी में एक खुशनसीबी यह भी है कि मुझे दोस्त हमेशा बहुत अच्छे मिले।
मेरे दोस्त तुम्हारा शुक्रिया मेरे साथ हमेशा खड़े रहने के लिए... शिवाय उठ खड़े होते हैं आदर्श के उठते ही दोनों दोस्त गले लग जाते हैं। दोनों के चेहरे पर खुशी और सुकून था।
चलो बाहर चलते हैं, आज बाहर कॉफी पीते हैं। शिवाय आदर्श का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ते हैं। और वैसे ही हाथ पकड़े हुए बाहर निकलते हैं। सारे वर्कर उनको देख कर मुस्करा कर खड़े हो जाते हैं।
हम जा रहे हैं पार्टी करने आफिस संभाल लेना... शिवाय ज़ोर से कहते हैं और हंसते हुए बाहर निकल जाते हैं।
ओके बॉस और तेज़ हंसी की आवाज़ बाहर तक उनके कानों में गूंजी थी।
...
श्लोका बालकनी पर खड़ी आसमान की ओर देख रही थी। वह नन्हें-नन्हें सितारे जिन्हें वह बचपन से देखती आ रही थी। वह सितारे आज भी वैसे ही टिमटिमा रहे थे।
क्या हुआ आसमान में क्या ढ़ूंढ़ रही हो? तभी शिवाय उसके करीब आकर कहते हैं उनके हाथ में कॉफी का मग था।
आप कब आए मुझे आहट ही नहीं लगी?
जब तुम आसमान में कुछ तलाश रही थी। शिवाय कॉफी का सिप लेकर मग उसकी तरफ बढ़ाते हैं।
मैं इन तारों को देख रही थी जो अपनी जगह पर आज भी वैसे ही टिमटिमा रहे हैं, और हमारी ज़िन्दगी दुख-सुख अंधेरे-उजाले से होते हुए कहां से कहां पहुंच गई।
उतार-चढ़ाव सबकी ज़िन्दगी में होते हैं, लेकिन हमें सिर्फ अपने ही दुख अपनी ही परेशानी नज़र आती है। आसमान पर टूटते तारों पर हमारी नज़र कम ही जाती है, लेकिन चमकते हुए तारों को हम हमेशा देख लेते हैं।
वैसे ही हमारी ज़िन्दगी है, आज शिवाय और श्लोका की ज़िन्दगी को लोग रश्क से देखते हैं, लेकिन इन खुशियों की कीमत क्या रही... यह सिर्फ हम जानते हैं।
आप सही कह रहे हैं शिवाय, लेकिन सब के बाद आज हम अपने घर में सुकून से हैं, हमें इस से ज़्यादा और क्या चाहिए। श्लोका प्यार से शिवाय को देखती है।
उन मुश्किल के दिनों में हमारा प्यार और हम दोनों का साथ हमें हौसला दे गया। अगर हम साथ हैं तो हम किसी भी मुश्किल से आसानी से लड़ सकते हैं। कहते ही शिवाय एक प्यार भरी नज़र श्लोका पर डालते हैं और उसके बालों में लगा क्लैचर छुड़ा कर उसके बालों को बिखेर देते हैं।
दुनिया की सारी खुशी एक तरफ... और शिवाय सिंह ओबेरॉय की यह खुशी एक तरफ... श्लोका हंसते हुए शिवाय को देख कर कहती है जिस के चेहरे की खुशी इस वक्त देखने लायक थी।
और उसकी बात पर शिवाय भी ज़ोर से हंसते हैं। और उसका हाथ थाम कर कमरे की तरफ बढ़ जाते हैं। आसमान पर चमकते तारे एक साथ यूं टिमटिमाते हैं जैसे वह भी उनको हंसता देख हंस पड़े हों...The End
धड़कन...शिवाय और श्लोका से शुरू हुआ सफर, जो दिल की धड़कन से शुरू हुआ और मुहब्बत की डोर से सब को बांध गया।
शिवाय और श्लोका की मुहब्बत जो लफ्ज़ो की मोहताज़ नहीं थी। जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता था। और मुझे खुशी है कि आप सब ने पढ़ कर महसूस किया उस प्यार को जो हमारी ज़िन्दगी से जुड़ गया था।
श्लोका और शिवाय की मुहब्बत जिसे शायद बहुत सारे लोग जीना चाहते हैं। लेकिन ऐसी मुहब्बत शायद किताबों में ही मिलती है। एक ऐसी मुहब्बत जिसमें त्याग, समर्पण और विश्वास की भरपूर मात्रा हो। जहां लेने से ज़्यादा देने में विश्वास होता है।
"धड़कन" से शुरू हुआ मुहब्बत का सफर "डोर धड़कन से बंधा" पर खत्म हुआ। बंधन का यह सफर आगे बढ़ता रहेगा। जिसे हम और आप आगे बढ़ाएंगे, अपने मुहब्बत यकीन और सबर से...
शिवाय और श्लोका की तरह हमारी ज़िन्दगी में भी परेशानियां और दुख हैं, लेकिन हमारी ज़िन्दगी में मुहब्बत और यकीन की कमी है।
आइए आज हम सब एक वादा करते हैं...अपनी ज़िन्दगी को मुहब्बत से भर देते हैं। दूसरों को मुस्कान और खुशियां देते हुए आगे बढ़ते हैं।
इसी उम्मीद के साथ हम अपनी बात खत्म करते हैं।
आप के कमेंट का इंतेज़ार रहेगा।
इस सीरीज़ को पढ़कर आप ने क्या महसूस किया।
आप ने यह सीरीज़ क्यों पढ़ी।
इस सीरीज़ की सबसे अच्छी बात आप को क्या लगी।
आपके जवाब का इंतेज़ार रहेगा।
-Anjum Ansari
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