डोर धड़कन से बंधी | भाग 100 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 100 | Hindi Romantic Story

आता हूं मौम, जब तक आप रस्मों की तैयारी करें। कहते हुए प्रेम स्टडी रूम का दरवाज़ा खोलता है। दरवाज़ा बन्द होने तक उसे दोस्तों की हूटिंग सुनाई दी।

 उस के होंठों पर मुस्कान आ गई।

अंदर जाकर वह नताशा को सोफे पर बैठा कर खुद उसके सामने सोफे पर बैठ जाता है। 

उसकी नज़र उस पर ठहर गई।

लाल बनारसी साड़ी पहने, गले में खूबसूरत नेकलेस के साथ मंगलसूत्र, माथे पर टिका मांगटीका, कानों में झुमके, जो उसकी हरकत पर धीरे से हिलते, मानो उस की बेचैनी बयां कर रहे हों।

माथे की बिंदी और आंखों में सजी काजल की लकीरें उसकी सुन्दरता को और गहरा कर रही थीं, मगर सब से ज़्यादा जो बात प्रेम को छू गईं, वह उसकी आंखें थीं। उनमें चमक कम और सवाल ज़्यादा थे।

और उसी सवालों के जवाब देने के लिए वह उसे यहां लाया था। क्योंकि उस ने देख लिया था कि घर देखकर ही वह बहुत कुछ समझ चुकी थी।

मन में जितने भी सवाल हैं सब पूछ लो। प्रेम हल्की मुस्कान के साथ बात शुरू करता है।

आप ने अपने बारे में मुझे बताया क्यों नहीं?… प्रेम का सवाल सुनकर कुछ पल खामोश रहने के बाद वह पूछती है।

तुम ने कभी पूछा ही नहीं। 

आफिस में जब मैंने पूछा था कि आप भी नए हो तब?…

नया ही तो हूं। पढ़ाई करके आया हूं। अभी काम शुरू ही किया है। प्रेम मुस्कुराया।

ओबेरॉय इंडस्ट्री… वह रूकी…

हमारी है…

आप ने यह बात क्यों नहीं बताई।

बता देता तो?…

मैं आप से शादी ना करती…

क्यों?…

क्योंकि आप का और हमारा कोई जोड़ नहीं।

जोड़े तो आसमानों पर बनते हैं…ऐसा मैने सुना है।

वह खामोश रह गई।

प्रेम अपनी जगह से उठा।

उसके कदमों में कोई हड़बड़ी नहीं थी, बस एक गहरी सच्चाई थी। नताशा कुछ समझ पाती, उससे पहले ही वह उस के सामने झुक गया। नताशा अनायास ही चौंक गई, जैसे किसी ने उसके अंदर चल रही उथल-पुथल को छू लिया हो।

अगले ही पल प्रेम उसके कदमों में बैठ चुका था।

सिर हल्का सा झुका हुआ, आंखों में संकोच और समर्पण एक साथ।

यह झुकना किसी रस्म का हिस्सा नहीं था, ना ही कोई दिखावा…

यह उस इंसान का प्रेम था, जो ऊंचाई से नहीं, बराबरी से रिश्ता निभाना चाहता था।

कमरे की खामोशी और गहरी हो गई। नताशा की उंगलियां साड़ी में उलझ गईं, सांसें तेज़ हो गईं।

उसकी आंखें भर आईं, क्योंकि वह समझ चुकी थी उसके सामने बैठा शख्स उससे सिर्फ शादी नहीं, उसकी रज़ामंदी और विश्वास मांग रहा है।

दौलत, नाम, ओहदा इन सब को एक पल के लिए भूल जाओ, उसने बेहद धीमी मगर ठहरी हुई आवाज़ में कहा। आज सिर्फ मुझे देखो। उस ने सिर उठाया 

नताशा की उंगलियां अंजाने में आपस में उलझ गईं। 

उसकी आंखों में नमी उतर आई।

अगर मुझे पहले पता होता…उसकी आवाज़ कांप गई।

तो तुम मुझे नहीं, मेरे नाम को देखती, प्रेम ने बात पूरी की।

और मैं नहीं चाहता था कि तुम मुझसे नहीं…ओबेरॉय इंडस्ट्री के वारिस से शादी करो।

कमरे में कुछ पल खामोशी रही। बाहर से शहनाई की हल्की-सी धुन आ रही थी, लेकिन अंदर सिर्फ दिलों की आवाज़ थी।

नताशा ने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया।

प्रेम ने उसका हाथ थाम लिया।

मुझे अमीरी से डर नहीं लगता, उसने भर्राई आवाज़ में कहा, मुझे उस दूरी से डर लगता है, जो इस अमीरी की वजह से हमारे बीच आ सकती है।

प्रेम ने पहली बार राहत की सांस ली।

तो उस दूरी को आने ही मत देना, उसने उसकी हथेली को हल्के से पुश किया।

नताशा की आंख नम हो गईं, लेकिन होंठ मुस्कुरा उठे।

बाहर किसी ने आवाज़ दी,

दुल्हा-दुल्हन आ रहे हैं?

प्रेम खड़ा हुआ, नताशा की ओर हाथ बढ़ाया।

अब चलें?

नताशा ने उसका हाथ थाम लिया।

अब चलें।

दोनों बाहर निकलते हैं। उन को देख कर सब ज़ोरदार तालियों से उनका स्वागत करते हैं।

नताशा शर्मा जाती है।

प्रेम मुस्कुरा कर दोस्तों के साथ बैठ जाता है।

रस्में शुरू होती हैं। एक के बाद एक रस्में हो रही थीं। 

नताशा मुस्कुरा रही थी। प्रेम के दिल में सुकून उतर आया।

मुंह दिखाई की रस्म शुरू हुई। एक-एक कर हर कोई उस के पास आ रहा था, और अपना परिचय देकर उसको तोहफा दे कर शादी की मुबारकबाद दे रहा था।

सबसे आखिर में शिवाय और श्लोका आगे आते हैं।

कहने को तो हम तुम्हारे सास-ससुर हैं, लेकिन तुम हमको मौम डैड कह सकती हो। कहते हुए शिवाय उस के सर पर हाथ रखते हैं।

नताशा की आंखें नम हो जाती हैं, वह उनके कदमों में झुक जाती है आशिर्वाद के लिए। श्लोका उसे उठा कर गले से लगा लेती हैं।

नम आंखों के साथ मुस्कुराता चेहरा प्रेम की नज़रों में छा गया।

हमारी तरफ से तुम्हारा शादी का तोहफा...श्लोका एक फाइल नताशा की ओर बढ़ाती हैं।

फाइल लेकर नताशा उसे खोलती है। उसके हाथों में कंपन हुई।

पहले पेज पर लिखा था मायका...

वह आगे पलटती है, एक खूबसूरत घर का नक्शा था। एक पेज और पलटती है, और रूक जाती है, कुछ लाइन ही वह पढ़ पाती है और हैरानी से शिवाय को देखती है।

उसकी आंखों में नमी के साथ सवाल थे... मगर ज़ुबां खामोश थी।

यह एक बेटी का मायका है जो उसका पिता उसे सौंप रहा है। एक लड़की को दुनिया में हर चीज़ से ज़्यादा अपना मायका अज़ीज़ होता है। मायका हर बेटी का मान होता है। मैं वही मान तुमको सौंप रहा हूं।

शिवाय की आवाज़ में ठहराव था, जैसे हर शब्द किसी ज़िम्मेदारी के साथ रखा जा रहा हो।

यह घर तुम्हारी पहचान है। जहां तुम बिना वजह लौट सकती हो... बिना सवालों के रह सकती हो।

यह घर तुम्हें याद दिलाने के लिए है कि तुम किसी की सिर्फ परछाईं नहीं,

एक पूरा अस्तित्व हो।

नताशा की आंखों से आंसू बिना रुके बहने लगे।

उसने फाइल को सीने से लगा लिया, जैसे किसी ने उसके भीतर की उस डरती हुई बच्ची को सहला दिया हो, 

पापा...

शब्द अपने आप उसके होंठों से फिसल गया।

शिवाय की आंखें भर आईं। लेकिन होंठों पर मुस्कान थी।

शहनाई की धुन फिर से तेज़ हो गई।

किसी ने हंसते हुए कहा,

अरे अब दुल्हन को रूलाओ मत, फोटो भी तो लेना है!

हंसी की लहर पूरे हॉल में फैल गई।

खुशियां ओबेरॉय मेंशन में दस्तक दे रही थीं। दुख और परेशानी के बादल छंट रहे थे। चेहरों पर खुशी और दिल में सुकून था। मुहब्बत की डोर धड़कन से बंध रही थी। 

जारी है...

डोर घड़कन से बंधी भाग 99

डोर घड़कन से बंधी भाग 101


 










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