डोर धड़कन से बंधी | भाग 99 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 99 | Hindi Romantic Story
शिवाय सिंह ओबेरॉय अखलाक, दरियादिली और रिश्तों को निभाते हुए यहां तक पहुंचे थे। तब आज उनको मान-सम्मान और प्यार मिला था। वरना लोग चार दिन अच्छे कर्म करके उम्मीद लगा लेते हैं कि मैंने अच्छा किया, और अच्छा नहीं मिला। शिवाय जैसे लोग उम्र गंवा देते हैं अच्छाई करते-करते लेकिन बदले की आस नहीं लगाते।
...
घर का माहौल कई दिनों से खराब था। कोई भी राहिल की बात मानने को कोई तैयार नहीं था। लेकिन फिर भी वह सब को मनाने में लगा था।
सबा, शाइस्ता खामोशी से घर का काम करके पढ़नें बैठ जाती।
असमा अलग परेशान थी।
अम्मी आज फिर पार्टी का फोन आया था कि परिवार के साथ आना है। उन्होंने हर किसी का नाम लेकर इन्वाइट किया है।
मुझे यह समझ नहीं आता कि उन को सब का नाम कैसे पता लगा। असमा परेशानी से कहती है।
अब जो भी हो, लेकिन सब को चलना है। आप तो जानती हैं कि इस कंपनी से कितना बड़ा आर्डर मिला है। अगर हम नहीं गए तो वह आर्डर कैंसिल ना कर दें।
राहिल सही कह रहा है। हम सब को चलना चाहिए। ताहिर सब को देख कर कहता है।
पता नहीं कौन-कौन होगा वहां? असमा परेशान हुई।
उन्होंने कहा है फैमली डिनर है। इस का मतलब ज़्यादा लोग नहीं होंगे। राहिल सोचते हुए कहता है।
ठीक है फिर सब लोग चलते हैं क्यों नानू? राहिल नानू को देखता है।
हां ठीक है…सब लोग वक्त से तैयार हो जाना। वह बात खत्म कर देते हैं।
ताहिर मेरा फोन बन नहीं सकता? असमा परेशानी से ताहिर से पूछती हैं।
बताया तो नहीं बन सकता। इसी लिए तो आप का नया फोन ला दिया है।
उस फोन में अम्मी के किसी खास का नम्बर था। सबा धीरे से ताहिर से कहती है।
चुप रहो तुम और जाकर अपना काम करो। असमा उसे झिड़क देती हैं और उठ कर अंदर चली जाती हैं।
कौन है वह जिसका नम्बर अम्मी को चाहिए? ताहिर सोचते हुए सबा से पूछता है।
मुझे क्या पता…कहते ही सबा भी अंदर चली जाती है।
आप कहां हो शिवाय भाई?…आप ने कहा था कि सबा, शाइस्ता का रिश्ता करने से पहले मुझ से बात कर लेना। दोनों बेटियों का रिश्ता आया है। काश मैं आप का नम्बर याद कर लेती। असमा मन ही मन शिवाय से बात करती है।
...
ओबेरॉय मेंशन में आज एक खास डिनर पार्टी थी। जिसमें आदर्श ने सबको इन्वाइट किया था।
घर के लोगों के इलावा कुछ और भी मेहमान थे जिसे आदर्श ने इन्वाइट किया था। लेकिन वह मेहमान कौन हैं यह कोई नहीं जानता था।
घर के सब लोग वहीं थे। आदर्श की फैमली आ चुकी थी। रवि, हेमंत और अशोक भी आ गए थे। अराध्या और अमोल की फैमली पहले ही आ गई थी।
आने वाले मेहमान भी सब से मिल कर खामोशी से बैठे हुए थे। इतने अमीर लोगों के साथ बैठ कर वह सब असहज थे।
उसी वक्त ऊपर से शिवाय और श्लोका बातें करते हुए सीढ़ियां उतरते दिखाई देते हैं। शिवाय और श्लोका इस डिनर से अंजान थे।
बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते…आदर्श एक खास अंदाज़ में कहते हैं। और सब की नज़र सीढ़ियों पर उठ जाती है। राहिल जो सामने बैठा हुआ था। दौड़ कर शिवाय के करीब पहुंच कर उनके गले लग जाता है।
राहिल तुम यहां?… शिवाय और श्लोका हैरानी से देखते हैं। तभी सारा परिवार उठ कर शिवाय को देखने लगता है।
सीढ़ियां उतर कर वह उन के करीब जाते हैं। हाजी साहेब और ताहिर से मिल कर वह दोनों लड़कियों से मिलते हैं। और फिर असमा के पास जाकर बगल वाले सोफे पर बैठ जाते हैं।
असमा जो शिवाय को देखकर अपना आंसू रोके हुए थी। शिवाय के बैठते ही बेतहाशा रो पड़ी। श्लोका असमा के पास बैठ कर उसे शांत कराती हैं।
ओबेरॉय इंडस्ट्रीज़ के मालिक आप हैं। राहिल शिवाय के पैरों के पास बैठ कर पूछता है।
हूं,
फिर आप वहां पर क्यों?
बस यूं समझ लो तुम सब से मिलना लिखा था। शिवाय मुस्कुराए। और राहिल को उठाकर पास बैठाते हैं।
हम सब आप दोनों को बहुत याद करते थे। और अम्मी का तो पूछो ही मत…सबा मुस्कुरा कर असमा को देखती है।
असमा उसे आंख दिखाती है। और सब हंस पड़ते हैं।
इन दोनों के लिए ही आप को याद करती थी। आप ही ने तो कहा था कि इनका रिश्ता करने से पहले आप से पूछ लूं। और फोन खराब होने की वजह से आप का नम्बर चला गया।
असमा जल्दी से कहती है।
हां, अब इन दोनों को रूखसत करें। बहुत परेशान करती हैं यह आप को। श्लोका हंस कर कहती है। पूजा हैरानी से सब को देख रही थी कि कितनी मुहब्बत है सब में।
मुझे तो इस बात पर हैरानी है कि इतना रईस इंसान कैसे वह ज़िन्दगी जी गया। हाजी गफूर हैरानी से पूछते हैं।
यहां आप की शान-ओ-शौकत देख कर अंदाज़ा हो रहा है कि आप कैसी जीते हैं। और वहां पर सारे काम आप दोनों खुद करते थे।
छोटा-सा कमरा, मामूली बिस्तर, सादा खाना, दुकान की ड्यूटी और ऊपर से मेरी डांट… सलाम है आप को। हाजी साहेब फखर से उन्हें सलाम करते हैं। और वहां बैठा हर शख्स खड़ा हो जाता है। और सुधीर जी गर्व से अपने बेटे और बहू को देखते हैं।
ऐसा ना करें प्लीज़…शिवाय जल्दी से कहते हैं। और सब को बैठने का इशारा करते हैं।
वैसे आप लोग यहां कैसे?... और आदर्श की ओर देखते हैं।
यह काम तुम्हारा ही हो सकता है। शिवाय हंसे।
मुझे बहुत खुशी हुई आप सब से मिल कर। मैं और श्लोका आप से मिलने आते।
मुझे पता था कि तुम अपनी इस फैमली से किसी को नहीं मिलाओगे। इस लिए मैंने बुला लिया।
ऐसा क्यों? हाजी साहेब हैरान हुए।
मेरा यह दोस्त अपनी परेशानी छिपा जाता है। और खुशियां बांट देता है। यह जानता था कि आप लोग सामने आयेंगे तो इसकी वह ज़िन्दगी भी सामने आयेगी जो इन्होंने आपके यहां जी है। और आप समझ सकते हैं कि ऐसी ज़िन्दगी जीने वाला इंसान आप के वहां कैसी ज़िन्दगी जी गया। और ज़ुबान पर उफ नहीं आया। आदर्श गर्व से शिवाय को देख कर कहते हैं।
चलिए डिनर करते हैं। शिवाय बात बदल देते हैं।
शिवाय के उठते ही सभी लोग उठ जाते हैं।
खाना खाते हुए भी सब लोग बातें करते रहें।
आप अब शादी की तैयारियां करें। सभी बच्चों की साथ में शादी होगी। इन दोनों के लिए लड़के देख रखे हैं मैंने। आप अब बहू ढूंढें।
ठीक है, मैं देखती हूं। असमा तो उन से मिल कर ही खुश हो गई।
आप ने हमारे लिए किसे पसंद किया है? जाते वक्त सबा शिवाय के पास रूक कर धीरे से पूछती है। शाइस्ता भी उसके साथ थी।
परेशान मत हो, तुम्हारे चाहने वाले ही हैं। शिवाय मुस्कुरा कर कहते हैं।
थैंक्स...कहते हुए दोनों आगे बढ़ जाती हैं क्योंकि सब लोग बाहर निकल चुके थे।
...
ओबेरॉय मेंशन लाइटों से जगमगा रहा था। खुशियों के ढ़ोल बज रहे थे। हर तरफ उमंग और जोश था।
हल्दी, मेहंदी की रस्में सादगी से हो गई थीं। क्योंकि नताशा की मां यही चाहती थी। आज शादी थी। हर कोई तैयारी में लगा था। बारात बहुत ही सादगी से सिर्फ घर के लोग और प्रेम के दोस्त ही जा रहे थे।
शादी की सारी रस्में सादगी से हुई। नताशा की तरफ से रिश्तेदार के नाम पर पड़ोसी ही थे।
शादी की रस्मों के बाद जब दुल्हा दुल्हन बड़ों के आशिर्वाद के लिए आगे आए तो नताशा शिवाय को देख कर हैरान रह गई।
इन्होंने ही तो मेरा इंटरव्यू लिया था। यह प्रेम के पिता हैं। शायद वह ऊंची पोस्ट पर हैं। इस लिए इन का लाइफ स्टाइल ऊंचा है। नताशा मन ही मन सोचती है।
खाने के बाद जल्द ही विदाई हो जाती है।
गाड़ियां ओबेरॉय मेंशन पहुंच चुकीं थी। दुल्हन गाड़ी में बैठी हुई थी। वह नज़र उठा कर घर की तरफ देखती है। और हैरान रह जाती है ।
तभी पूजा आकर नताशा का हाथ थाम कर गाड़ी से उतारती है, और अंदर की तरफ बढ़ती है।
हर कोई अंदर पहुंच चुका था और दुल्हन का इंतेज़ार कर रहा था।
गृह प्रवेश के बाद जैसे ही पूजा नताशा को लेकर अंदर की तरफ बढ़ती है प्रेम आगे बढ़कर नताशा का हाथ थाम लेता है, और स्टडी रूम की तरफ बढ़ जाता है।
आता हूं मौम, जब तक आप रस्मों की तैयारी करें। कहते हुए प्रेम स्टडी रूम का दरवाज़ा खोलता है। दरवाज़ा बन्द होने तक उसे दोस्तों की हूटिंग सुनाई दी। और उस के होंठों पर मुस्कान आ गई।
जारी है…
डोर घड़कन से बंधी भाग 100
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