धड़कन | भाग 50 | Dhadkan Part 50 | Heart Touching Hindi Love Story
और अगर मैं तुम को पसंद ना करता तब क्या होता? शिवाय के मन में भी एक-एक कर सवाल आ रहे थे।
हम दोनों के रास्ते अलग होते। मैं कभी भी आपको वादों के भेंट ना चढ़ाती। श्लोका यकीन से कहती है।
हम दोनों को एक होना ही था। क्योंकि हमारे साथ हमारे बड़ों की दुआएं थी।
यह सच है हम ने कोई वादा नहीं किया। कभी कोई इज़हार नहीं किया। लेकिन फिर भी हम दोनों एक दूसरे के लिए जीने लगे थे। हम ने हमेशा एक दूसरे के बारे में सोचा। मैंने कभी अपने प्यार का इज़हार नहीं किया। क्योंकि कभी मुझे इस की ज़रूरत नहीं पड़ी। क्योंकि मैंने देख लिया था तुम बिना कहे ही मेरी मुहब्बत को कबूल कर चुकी थी। क्यों सही कह रहा हूं ना?
अपनी बात खत्म करके शिवाय श्लोका से सवाल करते हैं। और श्लोका शिवाय को देखती रह जाती है। शिवाय के साथ गुज़रे हर लम्हे उस की आंखों में थे। कोई लम्हा ऐसा नहीं गुज़रा। जब उसे अपने फैसले पर पछताना पड़ा हो।
क्या देख रही हो? जैसा भी हूं। तुमको मेरे साथ ही अब सारी ज़िन्दगी गुज़ारनी है। शिवाय ने मुस्कुराते हुए कहा। श्लोका भी मुस्कुरा दी।
उसी वक्त शिवाय का फोन बज उठा। बात करते ही शिवाय उठ खड़े हुए। चलो डिनर करते हैं।
श्लोका भी उठ गई।
श्लोका के उठते ही शिवाय बिल्कुल उसके सामने आ गये। और उसे देखने लगे।
I Love you.... कहते वक्त शिवाय की आंखों में सारे जहां का प्यार दिख रहा था।
श्लोका शिवाय की इस अदा पर कुर्बान हो गई। I Love you शिवाय..... श्लोका के कहते ही शिवाय श्लोका को बहुत कस के हग करते हैं।
तुम ने मुझे जो खुशी दी है वह खुशी शायद मैं सारी दौलत देकर भी नहीं खरीद सकता।
चलें अब डिनर के लिए? श्लोका पीछे हटती है। दोनों बातें करते हुए बाहर निकल जाते हैं।
आप ने मेरी ड्रेस कैसे तैयार कराई। श्लोका को शिवाय की बात याद आ गई जो वह फोन पर कर रहे थे कि सब की ड्रेस तैयार है।
फैक्टरी में स्नेहा ने तुम्हारा मेज़रमेंट लिया था ना। वह मेरे ही कहने पर था। शिवाय हंसते हुए कहते हैं।
और अगर मैं शादी से मना कर दूं तो? श्लोका को शरारत सूझी।
जी पाओगी मेरे बिना तो मना कर दो। शिवाय ने गहरी नज़रों से उसे देख कर कहा। शिवाय की बातों में आत्मविश्वास था।
श्लोका ने शिवाय की तरफ देखा। जिस की आंखों में प्यार ही प्यार था। श्लोका हल्का मुस्कुराई, और उसके होंठों पर ठहरी वो मुस्कान उसके दिल की धड़कनों को छुपा नहीं पा रही थी।
श्लोका ने उसे चिढ़ाते हुए कहा, सोचने दो थोड़ा... और आगे बढ़ गई।
शिवाय वहीं खड़ा उसे जाते हुए देखता रहा। उसने धीरे से कहा, सोचना कब तक है, श्लोका? मैं यहां इंतज़ार करता रहूंगा।
श्लोका रुक गई। वह जानती थी, शिवाय का प्यार गहरा था, इतना गहरा कि वह उसके हर नखरे और हर सवाल का जवाब बन गया था। उसने पीछे मुड़कर देखा, इतना इंतज़ार करोगे?
शिवाय ने जवाब में मुस्कुराते हुए कहा, ज़िंदगी भर। लेकिन तुमसे दूर नहीं।
श्लोका कुछ पल के लिए ठिठक गई। शिवाय की बातों ने उसके दिल के हर कोने को छू लिया था। उसने चाहा कि वह कुछ कहे, पर शब्द उसके होठों तक आकर रुक गए। उसकी आंखों में प्यार और भावनाओं का समंदर उमड़ पड़ा था।
क्या हुआ, श्लोका? शिवाय ने पास आकर धीरे से पूछा।
कुछ नहीं... श्लोका ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं।
तुम्हारे 'कुछ नहीं' में बहुत कुछ होता है। कह दो, श्लोका। शिवाय ने उसकी आंखों में झांकते हुए कहा।
श्लोका ने शिवाय का हाथ पकड़ा और धीरे से कहा, तुम्हारे बिना सोचने का सवाल ही नहीं उठता।
शिवाय की मुस्कान गहरी हो गई। उसने हल्के से श्लोका की ठोड़ी को ऊपर उठाया और कहा, तो फिर कभी मज़ाक में भी यह मत कहना। तुम्हारे बिना मैं भी कुछ नहीं।
श्लोका ने सिर हिला दिया। वह जानती थी कि शिवाय का प्यार उसकी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत सच था।
जारी है...
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